कहते हैं वक्त की गुलाम हर शै होती है, कब राजा को भिक्षु बना दे कुछ नहीं कहा जा सकता, ऐसा ही एक परिवार है राजधानी के सबसे पॉश इलाके गोमतीनगर में जिसका मुखिया चीफ मेडिकल अफसर था, लेकिन एक अरसे से इस परिवार के सभी लोग भीख मांग कर अपना गुजारा कर रहा।
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बीएन माथुर का घर
- फोटो : अमर उजाला
गोमतीनगर के विनय खंड में जहां तमाम खूबसूरत मकान बने हुए हैं, उन्ही मकानों के बीच एक खंडहरनुमा घर भी है, जहां इंसान तो क्या जानवर भी शायद नहीं रह सकता, इसी घर मे रहती हैं राधा और मांडवी माथुर, राधा और मांडवी के बड़े भाई बीएन माथुर का पिछले ही साल देहांत हुआ है।
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माथुर परिवार
- फोटो : अमर उजाला
राधा और मांडवी के पिता एमएम माथुर चीफ मेडिकल अफसर थे इसलिए बचपन सुविधाओं से परिपूर्ण था, बड़ी-बड़ी कारों में घूमना और घर मे सभी सुख सुविधाएं देख कर बड़ी हुई हैं, दोनों बहने ग्रेजुएट हैं। सब कुछ अच्छा चल रहा था कि एक दुर्घटना में माता पिता दोनों की मौत हो गई।
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टॉयलेट
- फोटो : अमर उजाला
दोनों बहनों का मानसिक संतुलन बिगड़ गया, बीएन माथुर पर परिवार की जिम्मेदारी आन पड़ी, बहुत नौकरी तलाश किया लेकिन नौकरी नहीं मिली, ऐसे में उन्होंने भीख मांगना शुरू कर दिया, 30 साल में घर खंडहर में तब्दील हो गया। घर के पीछे के हिस्से में लगा कमोट इस बात की गवाही देता है कि कभी ये घर काफी आलीशान रहा होगा।
इस वक्त दोनों बहनों की उम्र 60-65 है। रिश्तेदारों से भी संपर्क टूट गया, एक दिन रोटी बैंक की टीम खाना बांटने निकली तो इस परिवार से मिली और परिवार की संभव मदद करने लगी।
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