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वेलेंटाइन डे पर मुकम्मल हुई मोहब्बत की अनूठी दास्तां, औरों से अलग... बेहद खास है ये कहानी...

Thu, 15 Feb 2018 09:33 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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यह प्रमोदिनी उर्फ रानी के लिए खुशी का अवसर था, लेकिन उसकी आवाज बार-बार भर्रा रही थी। सरोज साहू से सगाई की अंगूठी पहनने के बाद वह बोल पड़ी, ‘ मैं इतना जरूर कहना चाहूंगी कि किसी के चेहरे या उसके शरीर को देखकर प्यार मत करो, उसके मन को देखकर प्यार करो।’ फिर उसने यह भी जोड़ा ‘अगर कोई तुमसे प्यार नहीं करता है तो भी प्यार से रहो, उस पर तेजाब तो मत फेंको।’

वेलेंटाइन डे पर प्रमोदिनी की अंगुली में सगाई की अंगूठी से चमकता मुहब्बत का अक्श समाज को यह आईना दिखा रहा था कि प्यार दिल देखकर करो चेहरे देखकर नहीं। दुनिया में जहां तमाम फैसले चेहरे को देखकर लिए जाते हैं, वहीं ये फैसला मन से मन के लगाव को बयां कर रहा था। यह सिर्फ एक-दूसरे से विवाह करने का कोई अनुबंध नहीं था, जीवन की तमाम विषम परिस्थितियों में एक-दूसरे के प्रति समर्पण और सहयोग की बुनियाद थी।
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बुधवार को वेलेंटाइन डे को खुशनुमा पल शीरोज कैफे में सजाए गए। खूबसूरत मंच बना था, पंडाल लगा था और आगंतुकों का स्वागत भी हो रहा था। शीरोज हैंगआउट की तेजाब पीड़िताएं ही नहीं नगर के ढेर सारे लोग इस पल के गवाह बने। शाम करीब सात बजे प्रमोदिनी और सरोज ने एक दूसरे को अंगूठी पहनाई तो देर तक तालियां बजती रहीं। करीब नौ साल पहले महज 15 वर्ष की उम्र में एकतरफा प्रेम में तेजाब का हमला झेलने वाली प्रमोदिनी के जीवन में सरोज का नाम प्यार और विश्वास के पर्याय के रूप में आया था। सरोज उनसे अस्पताल में मिले थे और अपने समर्पण से प्रमोदिनी का दिल जीत लिया था।
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डांस किया, गजलें भी हुईं
सगाई समारोह को शीरोज हैंगआउट और उसकी संचालक संस्था छांव फाउंडेशन ने संगीत के कार्यक्रम से यादगार बनाया। खुद प्रमोदिनी और सरोज ने सगाई के बाद दिल दिया गल्ला पर नृत्य किया तो प्रमोदिनी की तेजाब पीड़िता सखियों ने कई गीतों पर नृत्य किया। नृत्य के बाद कैलाश जोशी ने गजलें सुनाईं। कवि पंकज प्रसून ने समारोह का संचालन किया।

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ओडिशा में खोलेंगे शीरोज
शीरोज हैंगआउट की वासनी शर्मा ने बताया कि प्रमोदिनी के लिए हमने अभियान चलाया है। हम कुछ धनराशि इकट्ठा कर उसे देंगे, जिससे ओडिशा में प्रमोदिनी इसी प्रकार एक शीरोज कैफे खोल सके और वहां की तेजाब पीड़िताओं को इकट्ठा कर सके। समारोह में लखनऊ उड़िया समाज ने 25 हजार रुपये प्रमोदिनी और सरोज को प्रदान किए। गौरतलब है कि प्रमोदिनी राऊल मुख्यत: ओडिशा की रहने वाली है।
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एक साल बाद होगा विवाह
सरोज और प्रमोदिनी ने इस मौके पर बताया कि हालांकि विवाह की तिथि के बारे में अभी बहुत नहीं सोचा है, लेकिन सगाई के करीब एक वर्ष बाद ही हम विवाह पर विचार करेंगे।
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