यह प्रमोदिनी उर्फ रानी के लिए खुशी का अवसर था, लेकिन उसकी आवाज बार-बार भर्रा रही थी। सरोज साहू से सगाई की अंगूठी पहनने के बाद वह बोल पड़ी, ‘ मैं इतना जरूर कहना चाहूंगी कि किसी के चेहरे या उसके शरीर को देखकर प्यार मत करो, उसके मन को देखकर प्यार करो।’ फिर उसने यह भी जोड़ा ‘अगर कोई तुमसे प्यार नहीं करता है तो भी प्यार से रहो, उस पर तेजाब तो मत फेंको।’
वेलेंटाइन डे पर प्रमोदिनी की अंगुली में सगाई की अंगूठी से चमकता मुहब्बत का अक्श समाज को यह आईना दिखा रहा था कि प्यार दिल देखकर करो चेहरे देखकर नहीं। दुनिया में जहां तमाम फैसले चेहरे को देखकर लिए जाते हैं, वहीं ये फैसला मन से मन के लगाव को बयां कर रहा था। यह सिर्फ एक-दूसरे से विवाह करने का कोई अनुबंध नहीं था, जीवन की तमाम विषम परिस्थितियों में एक-दूसरे के प्रति समर्पण और सहयोग की बुनियाद थी।