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नोटबंदी से यूपी बेहाल: कोई लाश लेकर एटीएम पहुंचा तो कहीं सदमे ने ली जान

Sat, 26 Nov 2016 01:10 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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8 नवंबर को 500 व एक हजार रुपये के नोट अवैध घोषित किए जाने के बाद से देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में हाहाकार मच गया। हालत ये हो गई कि ये खबर सुनते ही किसी की मौत हो गई तो कोई लाश के अंतिम संस्कार के लिए एटीएम की लाइन मे जा लगा। तस्वीरों में देखें, नोटबंदी के फैसले का यूपी की जनता पर असर- (आख‌िरी स्लाइड में मैप पर देखें यूपी पर नोटबंदी का असर) 
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ये मामला अमरोहा जिले का है। अमरोहा के जोया कस्बे के हरासपुरा गांव में एक किसान परिवार की महिला लखबीरी (60) की मौत हो गई। उसके परिवार के पास पुराने नोट थे, पर वे बंद हो चुके हैं। परिवारीजन महिला का शव लेकर एचडीएफसी के एटीएम गए, तीन घंटे लाइन में लगे। जब उन्हें काफी मशक्कत के बाद पैसे मिले तो उन्होंने महिला का अंतिम संस्कार किया।
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नोटबंदी के चलते लोगों को हो रही परेशानियों को देखते हुए जहां कई बैंक बुजुर्गों के लिए अलग व्यवस्‍था कर रहे हैं, वहीं रामनगरी अयोध्या की यह खबर कुछ बैंकों की संवेदनशीलता पर सवाल उठाने वाली हैं। यहां खाते से रकम निकालने के लिए परिवारीजन अंतिम सांसे गिन रही महिला को खाट पर लेकर बैंक ऑफ बड़ौदा गए।

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कुशीनगर में नोटबंदी की खबर सुनकर एक महिला की सदमे से मौत हो गई। जिले में एक बुजुर्ग महिला जैसे तैसे जोड़े गए अपने पैसों को बदलने के लिए बैंक गई थी। जहां किसी ने उनसे कह दिया कि ये नोट अब नहीं चलेंगे। यह सुनते ही वृद्धा ऐसे सदमें में आई की वहीं दम तोड़ दिया। हमेशा की तरह प्रशासन के कानों तक खबर पहुंची तो जांच की बात कहकर मामला खत्म कर दिया गया।
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एक तरफ आम आदमी नकदी बदलने के लिए परेशान रहा तो दूसरी तरफ मंदिरों के दानपात्र में जमा धन भी वहां के स्टॉफ के लिए मुश्किल बन गया। वृंदावन के ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में एक गुल्लक खोली गईं। इसमें 17,45,170 रुपये की धनराशि निकली है। द्वारिकाधीश मंदिर की गुल्लक से 59,000 रुपये निकले हैं।
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उन्नाव जिले के सफीपुर कस्बे में सड़क किनारे अधजले नोट के टुकड़े पड़े मिले। कस्बेवासियों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने अधजले नोट के टुकड़ों को कब्जे में ले लिया है। सफीपुर के मोहल्ला सरांय सूबेदार में गुलाब बिल्डिंग के पास सुबह लोग कूड़ा फेंकने निकले। तभी कुछ लोगों की नजर सड़क किनारे नोट जलता हुआ देखा।
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लखनऊ की राजाजीपुरम् निवासी खुशबू की सगाई होने वाली थी लेकिन सगाई से एक दिन पहले सुबह से शाम तक शादी का कार्ड लेकर बैंक में कतार में लगी रही। खुशबू ने कहा कि घंटों बैंक की कतार में लगने के बाद जब उसका नंबर आया तो बैंक में कैश ही खत्म हो चुका था।

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बांदा में दिहाड़ी मजदूर धर्मेंद्र अपनी तीन साल की बच्ची के इलाज के लिए पैसा निकालने के लिए बैंक में लाइन लगाकर खड़ा था। इलाज में देरी होने के कारण उसकी बेटी की मौत हो गई। उसने बताया कि डॉक्टर ने उसे दूसरे अस्पताल में रेफर किया था।

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इसके अलावा, नोटबंदी से किसानों को भी बेहद मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार के फैसले की प्रशंसा तो की लेकिन यह भी कहा कि नोटबंदी से बुवाई के लिए खाद व बीज खरीदने में मुश्किलें आ रही हैं। इस फैसले ने जैसा असर शहरी जनजीवन पर डाला है, गांवों में भी वैसी ही उथल-पुथल मचाई है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जान खेतिहर किसान, बेरोजगार नौजवान और फुटकर दुकानदार इससे सीधे प्रभावित हुए हैं। संकट में भी दर-दर की तकलीफ सह रहे, कई-कई दिनों की लाइन लगा रहे ग्रामीण आमतौर पर फैसले के साथ हैं।

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बात लखनऊ की हो या बाराबंकी और सीतापुर। नोटबंदी को लेकर लोगों की मुश्किलें एक जैसी हैं। सिंधौली सीतापुर के श्रीपाल कहते हैं कि इस समय किसानों की नकदी का मुख्य स्रोत धान है। पर, बिक नहीं रहा है। खाद और जोताई के लिए, रिश्तेदारी में शादी के व्यवहार के लिए पैसा नहीं है। चक्की पर पिसाई तक हो नहीं पा रही है। खेतों में मिले किसानों का दर्द है कि फैसले के बाद हरी सब्जियों के दाम गिरे हैं। नई फसल की बुवाई के लिए खाद-बीज-पानी और पेस्टीसाइड की जरूरत है। लेकिन पैसा न होने और बैंक से मिलने में लंबी जद्दोजहद के कारण खेत की बुवाई ठीक से शुरू नहीं हो पा रही है। नोटबंदी से हर कोई परेशान जरूर है पर ज्यादातर लोग इसे कालेधन की अर्थव्यवस्‍था को खत्म करने के लिए सरकार द्वारा उठाया गया बड़ा कदम कह रहे हैं।
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नोट बंदी के बाद यूपी के शहरों में द‌िखे इस तरह के हालात

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