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कैंसर पीड़ितों को मिलेगी राहत, नई खोज से इलाज होगा आसान, ऐसे करें पहचान

Wed, 03 Jul 2019 04:38 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर
एसजीपीजीआई के प्रो. रामनवल राव ने लार ग्रंथि के कैंसर का इलाज खोज निकाला है। इतना ही नहीं अब चार से पांच घंटे की जांच में कैंसर की स्थिति की भी जानकारी मिल जाएगी और इसका इलाज समय रहते हो सकेगा। किस स्टेज में कौन सी दवा कारगर होगी, इसका भी पता चल गया है। अभी तक सिर्फ यह पता चलता है कि संबंधित में कैंसर है, लेकिन वह कितना प्रभावित कर रहा है, यह स्पष्ट नहीं था। इसके लिए प्रो. राव को सिडनी में आयोजित कॉन्फ्रेंस में अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
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प्रोफेसर डॉ रामनवल राव - फोटो : अमर उजाला
लार ग्रंथि के कैंसर का अभी तक माकूल इलाज नहीं हो पाता था। इसका पता अंतिम दौर में चलता था। ऐसे में मरीज को बचाना मुश्किल होता था। लगातार आ रहे मरीजों को देखते हुए एसजीपीजीआई की पैथोलॉजी में फाइनल निडिल एस्पिरेशन साइटोलॉजी (एफएनएसी) टेस्ट रिपोर्ट का अध्ययन किया गया। संस्थान के 350 मरीजों की जांच की गई। 20 से 60 साल वाले मरीजों की रिपोर्ट के आधार पर अध्ययन हुआ।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
इसके तहत निडिल से लार ग्रंथि में बने ट्यूमर (गांठ) के नमूने लिए गए। जांच रिपोर्ट को अमेरिकन सोसाइटी ऑफ  साइटो पैथोलॉजी और अंतरराष्ट्रीय एकेडमी ऑफ  साइटोलॉजी द्वारा विकसित की गई तकनीक मिलान सिस्टम फॉर रिपोर्टिंग सलिवरी ग्लैड साइटोपैथोलाजी (एमएसआरएसजीसी) पर परखा गया। इसे सात कैटेगरी में बांट कर कैंसर की स्थिति की जानकारी ली गई। यानी कितने मरीजों में कितने प्रतिशत कैंसर है। उदाहरण के तौर पर किसी मरीज में 70 फीसदी कैंसर है तो उसका उसी हिसाब से इलाज किया जा सकेगा।

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डॉ रामनवल राव - फोटो : अमर उजाला
देश का किया प्रतिनिधित्व, मिला सम्मान
एसजीपीजीआई पैथोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. रामनवल राव ने मिलान सिस्टम को संस्थान में लागू किया। 350 मरीजों की शोध रिपोर्ट के आधार पर उनका इलाज शुरू हुआ। इसके लिए उन्हें पिछले माह ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय साइटोलॉजी कांग्रेस सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी स्पीकर के रूप में आमंत्रित किया गया, जहां उन्हें सर्वश्रेष्ठ ई-पोस्टर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। भारत से जाने वाले वह इकलौते प्रोफेसर थे।

 
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प्रतीकात्मक तस्वीर
क्या है लार ग्रंथि
हर व्यक्ति के मुंह में लार ग्रंथियां होती हैं। प्रमुख लार ग्रंथि के तीन जोड़े छोटी ग्रंथियां होती हैं। इन्हें पैरोटोइड, सबमंडीबुलर और सबलिंगुअल ग्रंथियां कहा जाता है। ये मुंह में लार बनाती हैं। लार से भोजन नम बनता है, जिससे इसे चबाने और निगलने में मदद मिलती है। यह भोजन पचाने में भी मदद करता है। इसमें एंटीबॉडी होते हैं जो रोगाणुओं को मार सकते हैं। लार ग्रंथियों में किसी तरह की समस्या आने पर उसमें सूजन आ जाती है। धीरे-धीरे यह कैंसर ट्यूमर बन जाती हैं।

 
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ऐसे होती है जांच
लार ग्रंथि में कैंसर की पहचान के लिए एफएनएसी से जांच की जाती है। इसमें निडिल से कैंसर वाले हिस्से का पानी जैसा द्रव्य लेते हैं। इसकी जांच की जाती है। इसमें तीन से चार दिन लगता है। एसजीपीजीआई की पैथोलॉजी में इसकी जांच की सुविधा है। अभी तक रिपोर्ट में सिर्फ कैंसर होने की जानकारी मिलती थी। अब इसे सात कैटेगरी में बांटने से वह कितना नुकसानदेह है, इसका भी पता चल सकेगा। नई तकनीक से कैंसर का सटीक पता लगने पर उसी हिसाब से उसका इलाज भी हो सकेगा।

क्या है पहचान
- मुंह में खराब स्वाद महसूस होना
- मुंह खोलने में कठिनाई
- मुंह सूखना, चेहरे या मुंह में दर्द
- चेहरे या गर्दन में सूजन होना
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