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बच्चों की पढ़ाई के लिए मांगा खर्च तो सऊदी से फोन पर ही दे दिया तलाक

Mon, 17 Oct 2016 06:30 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
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तीन तलाक मुद्दा - फोटो : amar ujala
तलाक...तलाक...तलाक...और रिश्ते खत्म। सारी जिम्मेदारियां खत्म। कोई आजाद हो गया...किसी के हिस्से आई सिर्फ दर-दर की ठोकरें...। जिंदगी तबाह...। किसी के शौहर ने कागज के एक टुकड़े पर लिखकर दे दिया तो किसी ने शौहर से बच्चों की पढ़ाई और परवरिश के लिए पैसा मांगा तो सऊदी अरब से ही फोन पर ही तलाक दे दिया गया। ...तो किसी को शौहर की दूसरी शादी का राज जानना गुनाह हो गया। तीन तलाक से मिले जख्मों से जूझ रही महिलाओं की यही दास्तां है। 
अमर उजाला ने ऐसी महिलाओं से बात की, उनका दर्द जानने की कोशिश की। इन महिलाओं ने तीन तलाक को नाजायज बताया। कहा-तीन तलाक के नाम पर महिलाओं के होने वाले उत्पीड़न पर रोक लगे। मर्दों की तरफदारी और उनके मनमाफिक एकतरफा तीन तलाक कराने वाले मौलवियों के धंधे पर रोक लगे। उनकी दलील है कि उत्पीड़न रोकने के लिए सख्त कानून बनाया जाना चाहिए।
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जूबी जैदी - फोटो : amar ujala
दूसरी शादी का जब राज खुला तो दिया तलाक
ठाकुर गंज निवासी जूबी जैदी बताती हैं कि उनके पति सैयद अली मुर्तजा समर ने झूठ बोल कर शादी की। शादी के वक्त वह 25 की थीं जबकि मुर्तजा समर की उम्र 50 साल थी। निकाह के बाद अबुधाबी पहुंची तो वहां मुर्तजा की दूसरी शादी की बात का राज पता चला। इसके बाद तो जुल्म शुरू हो गए। पति ने खूब पीटा और बंधक बना लिया। किसी तरह गार्ड की मदद से भारत अपने परिवारीजनों को आपबीती बताई तो मदद मिली और मैं छूटी। तब ससुर ने लिखित माफीनामा देकर घर में रखा, लेकिन फिर जान से मारने की साजिश बनाने लगे। अबुधाबी में रहने वाले कुछ करीबियों के जरिये मेरे परिवार वालों ने बीच बचाव कराया तो पति अमौसी एयरपोर्ट पर छोड़ कर चला गया। दो दिन बाद तलाक नामा पहुंचा। आखिर खुदा ने मुझे हिम्मत दी। वकालत की प्रैक्टिस शुरू की और पति को सजा दिलाने के लिए खुद अपना केस लड़ रही हूं। पत‌ि ने पैसै के बल पर कई हमले कराए ले‌क‌िन मैं बच गई। जूबी कहती है ‌क‌ि ऐसे मामले में सख्त कानून है ल‌ेक‌िन और सख्ती की जरूरत है ‌ज‌िससे एनआरआई ‌क‌िसी की ‌ज‌िंदगी खराब करने से पहले सोचें। सुप्रीम कोर्ट को चाहिए कि तीन तलाक व तलाक जैसे मामलों में सख्त सजा का प्रावधान बनाए।
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कुरैशा खान - फोटो : amar ujala
खर्च मांगा तो सऊदी से फोन पर ही कह दिया तलाक
विकास नगर की कुरैशा खान को उनके पति मो. असरार ने इस बात पर तलाक दे दिया क्योंकि उन्होंने सऊदी फोन कर उनसे घर के खर्चे के लिए पैसा मांगा। कुरैशा बताती हैं कि पति सऊदी से न आ रहे थे, न खर्च भेज रहे थे। ऐसे में फोन पर बात की तो पैसा देने को कौन कहे, फोन पर ही तलाक कह दिया। दस साल हो गए तलाकशुदा जिंदगी बसर करते हुए। सुना है कि असरार सऊदी में दूसरी शादी किए हुए है। तीन तलाक पर कुरैश कहती हैं, मैं तो चाहती हूं कि सरकार ऐसा कानून बनाए जिससे एकतरफा तलाक देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके। या फिर तलाक देने वाला सारी जिंदगी गुजारा भत्ता दे। वह अपना हवाला देती हैं ‌क‌ि छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर बमुश्किल गुजारा चलता है। सरकार अगर ऐसा कानून लाती है जिससे तीन तलाक पर अंकुश लगे तो हमारी जैसी महिलाओं को जिल्लत की ‌जिंदगी न जीने को मजबूर होना पड़े।

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नुजहत शहाब - फोटो : amar ujala
दूसरा निकाह करने के बाद कागज पर लिखकर दिया तलाक
अमीनाबाद की नुजहत शहाब का यह बताते हुए गला रुंध आता है कि कैसे तलाक के बाद उनकी जिंदगी बेपटरी हो गई। कहती हैं निकाह के बाद से ही शौहर सेकम बनी। जब बेटा 11 साल का हो गया तो शौहर ने  दूसरी शादी कर ली। बाद में उन्हें एक कागज पर लिख कर तलाक दे दिया। वे बताती हैं पीलीभीत के रहने वाले पति के खिलाफ वे मौलवी से मिलीं तो उन्होंने तलाक को जायज बताया। कहती हैं-आखिर में अदालत पहुुंची। अदालत ने गुजारे के लिए पैसा देने का आदेश दिया, लेकिन पति ने कुछ नहीं दिया। इस सबके बावजूद बेटे को पढ़ाती रही। नुजहत कढ़ाई-बुनाई से होने वाली आमदनी से गुजारा करती हैं।
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सना फा‌त‌िमा - फोटो : amar ujala
देवर व परिवारीजनों के भड़काने से दिया तलाक
मौलवीगंज की रहने वाली सना फातिमा बताती हैं कि पति ने देवर व परिवारीजनों के कहने पर उन्हें पहले घर से निकाला और बाद में तलाक दे दिया। दो बच्चों को लेकर दर-दर भटकने को मजबूर कर दिया। सना बताती हैं कि गोलागंज निवासी पति की बड़ी कोठी है लेकिन मैं और बच्चे मकान के खातिर भटकते रहे। मौलवी तलाक तो करा देते हैं लेकिन औरत व उनके बच्चों को उनका हक नहीं दिलाते। कोठी में हमारा भी हक बनता है लेकिन कुछ नहीं मिला। तीन तलाक पर सख्त सजा और जीवन भर हर्जाना देने का कानून बनाया जाना चाहिए। 
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