राजधानी के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और स्टॉफ की मनमानी फिर सामने आई है। बुधवार रात तीन बजे प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला के परिवारीजन आशियाना के लोकबंधु अस्पताल के गेट पर खडे़ होकर चिल्लाते रहे, लेकिन नाइट ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और स्टाफ नर्स सोते रहे। गर्भवती को समय पर इलाज नहीं मिला और उसने गेट पर कार में ही बच्चे को जन्म दे दिया।
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तस्वीरें:सोते रहे डॉक्टर,गेट पर हो गया प्रसव
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कानपुर रोड स्थित एलडीए कॉलोनी के प्रदीप शर्मा की पत्नी दिव्या (26) को प्रसव पीड़ा के बाद परिवारीजन बुधवार रात करीब ढाई बजे लोकबंधु अस्पताल ले गए थे। बलरामपुर अस्पताल में स्टाफ नर्स और दिव्या की सास पुष्पा तिवारी ने बताया कि रात को जब महिला अस्पताल के गेट पर कार से पहुंचे तो वहां ताला लटका मिला। चैनल से आवाज दी तो कोई कर्मचारी नहीं आया।
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इस दौरान लॉबी में सोते रहे मरीजों के तीमारदार जग गए। पुष्पा के साथ मौजूद आशीष मौर्या और उनकी पत्नी सोनी ने भी डॉक्टरों और स्टाफ नर्स को आवाज दी लेकिन कोई नहीं आया। इस दौरान दिव्या प्रसव पीड़ा से कार में ही तड़पती रही। तीन बजे दिव्या ने अस्पताल के गेट पर ही कार में बच्चे को जन्म दिया।
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दिव्या की हालत बिगड़ी तो परिवारीजनों ने चैनल खड़खड़ाते हुए एक बार फिर आवाज दी तो किसी कर्मचारी ने गेट तो खोला, लेकिन इलाज के लिए कोई डॉक्टर या नर्स नहीं आए। इस पर पुष्पा तिवारी ने खुद मोर्चा संभाला और प्रसव के बाद मां-शिशु की जरूरी देखभाल खुद की। इसके बाद मरीज को वार्ड में भर्ती कराया गया। वहीं मामले को दबाने के लिए डॉक्टरों और स्टाफ ने बृहस्पतिवार दोपहर दो बजे ही प्रसूता को डिस्चार्ज कर दिया।
लोकबंधु अस्पताल के एक स्टाफ नर्स की मानें तो रात बारह बजे के बाद इलाज बंद हो जाता है। इमरजेंसी में पहुंचने वाले मरीजों को डॉक्टर से लेकर कर्मचारी कोई न कोई बहानेबाजी करके डफरिन,झलकारीबाई या क्वीन मेरी का रास्ता दिखा देते हैं। अस्पताल सूत्रों की मानें तो रात में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और स्टाफ नर्स कोई केस लेने से पूरी तरह बचते हैं।