क्वीन मेरी अस्पताल में 11 घंटे तक इलाज न मिलने से प्रसूता किरन की मौत के बाद डॉक्टरों ने शव देने के लिए भी घरवालों के सामने शर्त रख दी। डॉक्टर अपनी लापरवाही छुपाने की स्क्रिप्ट बनाने लगे। डॉक्टरों ने परिवारीजनों से सादे कागज पर हस्ताक्षर करवाने के बाद लिखवा लिया कि इलाज में कोई लापरवाही नहीं बरती गई और मरीज की हालत गंभीर थी, जिसकी जानकारी डॉक्टरों ने दी थी।
विज्ञापन
2 of 6
अपनी गलती छुपाने की स्क्रिप्ट पूरी करने के बाद डॉक्टरों ने करीब एक घंटे बाद दोपहर तीन बजे शव परिवारीजनों को सौंप दिया जिसके बाद परिवारीजन शव लेकर घर चले गए।
विज्ञापन
3 of 6
नर्स, बार्ड बॉय से लेकर गार्ड तक करते हैं वसूली
प्रसूता की बिना इलाज मौत के बाद अस्पताल में भर्ती दूसरे मरीजों के तीमारदारों का गुस्सा भी फूट गया। किरन के तीमारदार सुनील का आरोप था कि लेबर रूम से लेकर वार्ड तक में वसूली का धंधा चल रहा है। (विलाप करते परिवारीजन।)
4 of 6
उन्होंने बताया कि कर्मचारियों ने 500 रुपये से अधिक की रकम बेड, स्ट्रेचर और लेबर रूम में रखने के लिए वसूल ली। दूसरे मरीजों के तीमारदारों का आरोप था कि क्वीन मेरी में डॉक्टर से लेकर नर्स, आया, वार्ड बॉय, सफाई कर्मचारी और गार्ड तक वसूली का धंधा कर रहे हैं। किसी से शिकायत करों तो कोई सुनने वाला नहीं है और कहीं और इलाज कराने की धमकी दी जाती है। (महिला की मौत के बाद उसके परिवारीजनों को बाहर निकाला।)
विज्ञापन
5 of 6
अस्पताल में अफसरों की फौज, लेकिन मौके पर एक भी नहीं
क्वीन मेरी की विभागाध्यक्ष डॉ. विनीता दास मौके पर नहीं पहुंची, जबकि एमएस डॉ. एसपी जैसवार छुट्टी पर हैं। चार्ज डॉ. उमा सिंह के पास है लेकिन कोई भी अधिकारी अस्पताल में हुई घटना के बाद मौके पर नहीं पहुंचा। इन तीनों अधिकारियों के अलावा केजीएमयू वीसी प्रो. एमएलबी भट्ट, सीएमएस डॉ. यूबी मिश्रा, एमएस डॉ. विजय कुमार व मीडिया प्रभारी डॉ. नरसिंह वर्मा समेत दर्जनों पीआरओ की फौज है लेकिन कोई भी मौके पर नहीं पहुंचा। ( अस्पताल के बाहर लगी भीड़।)
वहीं तीमारदारों का कहना था कि सीनियर डॉक्टर ओपीडी और सुबह के राउंड के बाद गायब हो जाते हैं। रात में सिर्फ रेजिडेंट डॉक्टर व स्टाफ होते हैं, जो मनमानी करते हैं। शिकायत की बात पर भगा देने की धमकी दी जाती है।