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ऐसे जर्जर बैरकों में रहते हैं पुलिसवाले, एक लाइक तो बनता है

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जरा देखिए, पुलिसवाले लोग कैसे जर्जर मकानों में रहते हैं। इनका परिवार हमेशा इसी डर में जीता है कि कहीं घर ढह ना जाए।
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ऐसे जर्जर बैरकों में रहते हैं पुलिसवाले, एक लाइक तो बनता है

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आम आदमी की सुरक्षा करने वाले पुलिसकर्मी अपने ही घर और दफ्तर में सुरक्षित नहीं है। ये पुलिस वाले ऐसे जर्जर बैरकों में रहते हैं जो कभी भी ढह सकते हैं। रविवार को रिजर्व पुलिस लाइन के जर्जर कंट्रोल रूम का छज्जा गिरने से एक सिपाही की मौत के बाद बुधवार दोपहर जिलाधिकारी राजशेखर ने यहां विजिट किया।
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डीएम राजशेखर के साथ यहां पुलिस के आला ‌अधिकारी भी पहुंचे। इन सभी ने पुलिस स्टॉफ के जर्जर बैरकों का दौरा किया। डीएम ने देखा कि पुलिस स्टॉफ के ये जर्जर भवन आजादी से पहले के बने हुए हैं।

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अधिकतर भवनों की दीवारों में पड़ीं दरारें, टूटता प्लास्टर, जंग लगी सरिया व लटके छज्जे लापरवाही की कहानी बयां कर रहे हैं। जबकि हादसे के बाद अफसर मामले में लीपापोती में जुट जाते हैं। रविवार रात पुलिस लाइन के जर्जर कंट्रोल रूम का छज्जा ढहने से सिपाही अनिल कुमार अवस्थी की मौत हो गई थी। उसके बाद डीएम सहित पुलिस के आला अधिकारी यहां पहुंचे।
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रिजर्व पुलिस लाइन में बने आवास 50 वर्ष से अधिक पुराने हैं। इनमें से अधिकतर आवास जर्जर हो चुके हैं और दीवारों से प्लास्टर टूटकर गिरता है। इसकी चपेट में आने से कई लोग जख्मी हो चुके हैं। कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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इन आवासों में रहने वाले लोग दहशत में दिन काटते हैं। भूकंप तो दूर, आंधी व तूफान से ही इन जर्जर आवासों के ढहने का खतरा बना रहता है। तीन मंजिला पर बने आवासों की छत तक टपक रही है। बारिश होने पर लोगों के घरों में पानी तक भर जाता है।
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पुलिस लाइन के ब्लॉक नंबर चार के तीसरे तल की रेलिंग व स्लैब लटक गई है। उसमें लगी सरिया तक दिखने लगी है। ऐसे में लोग सहमे हुए हैं। लोग अपने बच्चों को छतों पर नहीं जाने देते हैं, पता नहीं कब हादसे की चपेट में आ जाएं।
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