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काश बेटा घर न आता तो बच जाती जान, छह माह की मासूम के सिर से उठा पिता का साया

Wed, 10 Jul 2019 04:43 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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घरों में पसरा सन्नाटा - फोटो : अमर उजाला
अभी रविवार रात तक उन घरों में खुशियां थीं। सोमवार की भोर आई मनहूस खबर ने यकायक सब कुछ तहस-नहस कर दिया। खुशियां असहनीय दर्द में और दर्द चीखों में बदल गया। दो दिन पहले तक जिनसे घर रोशन था, वहां मंगलवार शाम खामोश आंसुओं के बीच बस सन्नाटा पसरा था। यमुना एक्सप्रेस वे पर आगरा में जनरथ बस हादसे का शिकार हुए लखनऊ के 13 लोगों का मंगलवार को अंतिम संस्कार किया गया तो हर आंख नम थी।
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रोते बिलखते परिवारीजन - फोटो : अमर उजाला
हादसे में सरोजनीनगर के मनोज कुमार की मौत हो गई। वह परिवहन विभाग में नोएडा में तैनात थे। सोमवार देर रात उनका शव आजादनगर स्थित घर पहुंचा। वहां परिवारीजन व रिश्तेदार पहुंचे थे। घर पर पत्नी लीलावती और बहन ऊषा थी। शव लेकर भाई सतीश चंद्र घर आए। सुबह आलमबाग स्थित बैकुंठ धाम में अंतिम संस्कार किया गया। भाई सतीश चंद्र ने मुखाग्नि दी। मनोज के पिता-माता की पहले ही मौत हो चुकी है। हादसे में लीलावती का सुहाग तो छिना ही, साथ में घर की रोटी भी छीन ली। लीलावती पति का शव देखकर बेहोश हो गई।
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बेटे ने दी मुखाग्नि - फोटो : अमर उजाला
10 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि
हादसे में मृत गोमतीनगर विस्तार स्थित खरगापुर कौशलपुरी निवासी डॉ. मनीष सिंह का पार्थिव शरीर सोमवार देर रात उनके आवास पर पहुंचा। मंगलवार सुबह 10 बजे उनका अंतिम संस्कार बैकुंठधाम में किया गया। 10 साल के बेटे वंश ने मुखाग्नि दी। मूलरूप से वह गोंडा के वजीरगंज थानाक्षेत्र के खीरिया मझगवां के रहने वाले थे। तीन भाई व दो बहने हैं। बेटी बड़ी है जो बीकॉम कर रही है। अंतिम संस्कार के बाद परिवार गोंडा के लिए रवाना हो गया।

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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
लेखाधिकारी के घर पसरा सन्नाटा
सरोजनीनगर निवासी सुधीर मिश्रा की भी मौत हादसे में हुई थी। वह दिल्ली में दूर संचार विभाग में लेखाधिकारी के पद पर तैनात थे। शनिवार सुबह घर आए थे। रविवार रात को दिल्ली जा रहे थे। सुधीर हर शनिवार को लखनऊ आते थे। सुधीर का बेटा उपेंद्र मुंबई में और बेटी नियंता दिल्ली में नौकरी करते हैं। उनका पुश्तैनी मकान हुसैनगंज में है। परिवारीजन शव लेकर हुसैनगंज पहुंचे। अंतिम संस्कार बैकुंठधाम में किया गया।
 
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
कैसरबाग के कैंट रोड पर दो परिवारों में मातम
कैसरबाग के कैंट रोड निवासी किराना कारोबारी संजीव अग्रवाल और मोटर पार्ट्स कारोबारी मनीष गुप्ता के बेटे आदित्य के शव सोमवार देर रात घर पहुंचे। जवान बेटे आदित्य को पिता मनीष ने बैकुंठधाम में मुखाग्नि दी तो वहीं संजीव अग्रवाल को बेटे राघव ने। दोनों शव यात्रा में प्रदेश सरकार के कानून मंत्री ब्रजेश पाठक शामिल हुए और परिवारीजनों को ढांड़स बंधाया।
 
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हिमांशु मिश्रा - फोटो : अमर उजाला
... काश बेटा न आता तो बच जाती जान
एक पिता के लिए दुनिया का सबसे बड़ा दुख जवान बेटे की अर्थी को कंधा देना होता है। यह कहते हुए अरविंद मिश्रा फफक कर रो पड़े। रिश्तेदार और मोहल्ले वाले वाले परिवार का ढांढ़स बंधाने में जुटे थे। मंगलवार सुबह त्रिवेणीनगर अलहुदा स्कूल के पास रहने वाले हिमांशु मिश्रा की घर से अर्थी उठी तो हर किसी की आंखें नम हो गईं। बीमार मां अपने लाल का चेहरा देख बेहोश हो गई तो पत्नी स्मृति बार-बार बेसुध हो रही थी।
वह रोते हुए बोली कि छह माह की बेटी के सिर से पिता का साया उठ गया। दर्दनाक हादसे से पूरा परिवार बिखर गया। पिता अरविंद मिश्रा ने बताया दिल्ली से हिमांशु हमेशा फ्लाइट से आता जाता था। अरविंद मिश्रा ने इकलौते बेटे को मुखाग्नि दी। बोले, सुबह वह फ्लाइट से घर आया था। परिवार संग कार से लेकर सभी को चंद्रिका देवी मंदिर गया। दर्शन के बाद सभी ने रेस्त्रां में जाकर खाना खाया। शाम को फ्लाइट का टिकट न मिलने पर उसने बस से निकलने की बात कही। चचेरे भाई रेशू ने बताया कि जिस दिन सुबह वह घर आया था तो उसने अपने पुराने दोस्तों से भी मुलाकात की थी।
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