रोज डे पर बृहस्पतिवार को गुलाब का फूल देकर दोस्ती या मोहब्बत का इजहार किया हो या न किया हो, लेकिन आज प्रपोज-डे पर आप अपनी बात आगे बढ़ा सकते हैं। किसी को दोस्त बनाना चाहते हों या जीवनसाथी, झिझक छोड़िए और अपने दिल की बात कह डालिए।
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- फोटो : डेमो
वैलेंटाइन वीक के पहले दिन यानी रोज डे पर बृहस्पतिवार को लोगों ने दोस्ती और मोहब्बत का इजहार किया। आज प्रपोज डे है, यानी वह दिन जब आप किसी को अपना दोस्त या जीवनसाथी बनाने का प्रस्ताव रख सकते हैं। ऐसा करने में अक्सर लोगों को डर होता है कि सामने वाले ने अगर न कह दिया तो फिर क्या होगा, लेकिन इसका कोई दूसरा उपाय भी नहीं है, क्योंकि एक न एक दिन आपको आगे बढ़कर प्रपोज करना ही पड़ता है, और ऐसा करने वाले आप पहले शख्स भी नहीं होंगे। आज हम लखनऊ के उन लोगों की कहानी बता रहे हैं जिन्होंने बेहिचक अपनी बात कह डाली। आप भी पढ़िए...
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डॉ. गनेश चंद्र यादव पत्नी डॉ. सुशीला यादव के साथ
- फोटो : अमर उजाला
डर था कि कहीं दोस्ती भी न चली जाए
हमारी मुलाकात मुंबई में हुई थी। मुलाकात के करीब तीन साल बाद मैं सुशीला को प्रपोज करने का प्लान करने लगा था। मैं इस बात को लेकर काफी डरा हुआ था कि अगर उसने न कह दी तो मेरा क्या होगा। हमारी दोस्ती काफी अच्छी थी और इसे मैं खोना नहीं चाहता था। बहरहाल, एक दिन हिम्मत जुटाई और बोल दिया कि मैं तुम्हारा होना चाहता हूं। उन्होंने हां कर दिया। यह सुनते ही लगा जैसे मैंने सारा जहां जीत लिया।
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- फोटो : डेमो
वैलेंटाइन डे के दो दिन बाद है सालगिरह
हमारी शादी तीन साल पहले 16 फरवरी हो हुई। हालांकि हम दोनों चाहते थे कि हमारी शादी 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे के दिन ही हो, लेकिन बात बनी नहीं और शादी दो दिन बाद हुई।
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- फोटो : डेमो
उनकी सादगी का हुआ कायल
सुशीला मुंबई में पली बढ़ीं लेकिन उनमें दिखावा बिल्कुल नहीं है। उनकी सादगी का मैं कायल था। हमारी दोस्ती आगे बढ़ी और हम एक-दूसरे को अच्छे से जानने लगे। उनका मेरे परिवार में घुलना-मिलना और हर टॉपिक पर एकदम क्लीयर राय रखना मुझे बेहद पसंद है। डॉ. गनेश चंद्र यादव, सीनियर रेजीडेंट, जनरल सर्जरी, केजीएमयू पत्नी डॉ. सुशीला यादव के साथ
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माही सेंगर बिजनेस वुमेन पति सुमन समर्थ के साथ
- फोटो : डेमो
जाति के बंधन तोड़ किया प्रपोज
बात करीब आठ साल पुरानी है। मिठाईवाला चौराहा के पास का ओवरब्रिज नया-नया बना था। सुनील और मैं अलग जाति के थे। दोनों दोस्त थे। स्कूटी पर मैं उनके साथ थी। अचानक स्कूटी रुकी। उन्होंने स्कूटी की डिग्गी से बुके निकाला, घुटने पर आए और बोले- आप मुझसे शादी करेंगी। तब से हम साथ हैं।
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डेमो
पहली बार में यकीन नहीं हुआ
मुझे इस बात का अंदाजा तक नहीं था कि कम बोलने वाले, इंट्रोवर्ट सुनील मुझे इस तरह से प्रपोज करेंगे। सुनील ही वह शख्स हैं जो मुझे मेरे पैरेंट्स से भी ज्यादा जानते हैं। मेरे बारे में उनकी एनालिसिस एकदम करेक्ट होती है।
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डेमो
ऐसे हुई मुलाकात
एक कॉमन फ्रेंड के जरिए हमारी मुलाकात हुई थी। धीरे-धीरे हम दोस्त बने, लेकिन प्यार जैसी बात का हमें कोई अंदाजा नहीं था। लोग कहते थे, तुम लोगों की जोड़ी अच्छी है। हर रुकावट पार की
जाति अलग होने से मेरी फैमिली को आपत्ति थी। मैंने तय कर लिया था कि मैं सुनील के साथ रहूंगी। मैं अपनी फैमिली के खिलाफ गई और शादी कर ली। अब मेरी फैमिली भी मेरे साथ है। - माही सेंगर, बिजनेस वुमन पति सुनील समर्थ के साथ
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श्रीकांत सिंह पत्नी मधु सिंह के साथ
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फोन पर कर दिया इश्क का इजहार
मधु से मेरा संपर्क मैट्रीमोनियल वेबसाइट के जरिये हुआ था। चैटिंग के जरिये बात शुरू हुई। हम एक-दूसरे से पसंद, नापसंद समेत कई बातें शेयर करने लगे। यह सिलसिला एक सप्ताह तक चलता रहा। तब तक हम एक-दूसरे के बारे में बहुत कुछ जान चुके थे। मैं रेलवे स्टेशन पर था। रात के नौ बजे होंगे तभी उनका फोन आया। मैंने कह दिया कि आप मुझे पसंद हैं। वह कुछ पल के लिए एकदम शांत हो गईं। फिर उनकी आवाज सुनाई दी। उनका जवाब था कि ठीक है। मैं अपने पैरेंट्स से बात करूंगी।
तीन दिन बाद आया जवाब
करीब तीन दिन बाद उनका फोन आया। मेरी उत्सुकता बढ़ती जा रही थी। मुझे उनकी हां का इंतजार था, और उनकी हां मुझे मिल गई। उन्होंने कहा कि मैं भी उन्हें अच्छा लगता हूं। मैं उनकी आवाज का दीवाना हो गया
हमारी आमने-आमने मुलाकात नहीं हुई थी। फोटो, चैटिंग और फिर बाद में फोन से हम एक-दूसरे को जानते थे। पहली चैटिंग के करीब तीन माह बाद हमारी सगाई हो गई। -श्रीकांत सिंह, निजी कंपनी में फाइनेंस एंड अकाउंट मैनेजर पत्नी मधु सिंह के साथ