हम विशाखापट्टनम में एक कंपनी में काम करते थे। लॉकडाउन में कंपनी ने हमें नौकरी से निकाल दिया। खाने का भी ठिकाना नहीं रहा तो किसी तरह एक ट्रक करके अपने घर के लिए निकल पड़े।
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लखनऊ पहुंचे प्रवासी
- फोटो : अमर उजाला
बुधवार को लखनऊ के पारा पहुंचे हरीश कुमार सोनकर, दिलीप पांडेय, मनीष पांडेय अवनीश पांडेय, रामसागर, संदीप पांडेय, रामकृष्ण, आकाश ने यह दर्द बयां किया। इन्हें पुलिस ने बसों की जानकारी देकर डॉ. शकुंतला मिश्रा पुनर्वास विवि जाने की सलाह दी।
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अपनों घरों को रवाना होते प्रवासी
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पुनर्वास विवि पहुंचे इन प्रवासियों को बस से गृहजनपद गोंडा के लिए रवाना किया गया। इसी तरह लखनऊ पहुंचे हरदोई के रहने वाले राजकुमार, विपिन, अनुज, रमाकांत ने बताया कि गुजरात के सूरत में एक कंपनी में नौकरी करते थे।
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प्रवासी मजदूरों ने ट्रेन में मिले खाने को खराब बताकर स्टेशन पर फेंका
- फोटो : अमर उजाला
सब कुछ गंवाने के बाद अपने घर जाने का फैसला लिया। जीवन में पहली बार ऐसे दिन देखे। सपने में भी नहीं सोचा था यूं मजबूर हो जाएंगे। वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसी ही आप बीती बृहस्पतिवार शाम पुनर्वास विश्वविद्यालय में बैठे लोगों ने भी बताई।
प्रवासियों ने ट्रेन में मिला खाना स्टेशन पर खराब बताकर फेंका
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चारबाग पहुंचे 7500 प्रवासी, भेजे गए घर
श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के आने का सिलसिला जारी है। बुधवार को चारबाग रेलवे स्टेशन पर तीन श्रमिक स्पेशल ट्रेनें पहुंचीं, जिनसे करीब 3000 हजार से ज्यादा यात्री आये। इसमें चंडीगढ़ से आने वाली दो ट्रेनें और जलंधर से एक श्रमिक स्पेशल ट्रेन शामिल रही। दूसरी ओर चारबाग से तकरीबन 23 ट्रेनें पास हुईं जो स्टेशन पर रुकी और उनसे 4500 हजार से ज्यादा यात्री उतरे। जीआरपी और आरपीएफ ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए थर्मल स्क्रीनिंग के बाद श्रमिकों को बाहर निकाला। स्क्रीनिंग में स्काउट एंड गाइड की मदद ली गई। श्रमिकों को खाने के पैकेट देकर बसों से रवाना किया गया।