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जीवनयापन के लिए न्याय मांगने पहुंची बूढ़ी मां तो हाईकोर्ट ने दी ये टिप्पणी

Thu, 10 May 2018 12:42 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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गोंडा के मनकापुर स्टेशन परिसर में पिता को आवंटित दुकान उनकी मृत्यु के बाद बेटे ने रेलवे अधिकारियों से मिलकर अपने नाम करवा ली और मां को बेसहारा छोड़ दिया।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने मां के इस तरह भटकने को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया और बेटे से जवाब तलब किया है। वहीं रेलवे अधिकारियों पर भी नाराजगी भरी टिप्पणी करते हुए कहा कि चलताऊ और सतही जांच के आधार पर दुकान आवंटित की गई। 

मामले के अनुसार, जैनब निशा के पति को मनकापुर स्टेशन परिसर में फलों की दुकान संख्या 10 आवंटित थी। पति की मौत के बाद यह दुकान बेटे ने अपने नाम करवा ली। याची जैनब ने बताया कि वह 72 वर्ष की हैं।

उनके पास आय का कोई और साधन नहीं है। बेटा उनसे अलग रहता है और उनकी देखभाल नहीं करता। ऐसे में यह दुकान जैनब को आवंटित होनी चाहिए। मामले में रेल मंत्रालय सहित डीआरएम पूर्वोत्तर रेलवे और जैनब के बेटे को पक्षकार बनाया गया है। 
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सुनवाई के बाद जस्टिस शबीहुल हसनैन और जस्टिस राजन रॉय ने कहा कि एक बेटे की मां को अपने जीवनयापन के सहारे लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है।

दुकान उनके पति को आवंटित हुई थी, लेकिन बेटे के नाम हो गई। बेटे को दुकान आवंटित किए जाने पर जैनब ने रेलवे को शिकायत की थी, लेकिन विभाग ने चलताऊ ढंग से बिना मामले की गहराई में गए आदेश जारी कर दिया।

दुकान उनके बेटे को आवंटित करते समय जैनब को उचित ढंग से सूचना नहीं दी गई। जो सूचना दी गई, वह पुराने पते पर भेजी गई, जहां वे नहीं रहतीं। 

अदालत ने कहा, प्रथम दृष्टया लगता है कि जैनब का बेटा सही दस्तावेजों के साथ रेलवे अधिकारियों के पास नहीं पहुंचा था। फिर भी उसे बिना उचित जांच किए चलताऊ तरीके से लाइसेंस आवंटित कर दिया गया? ऐसे में बेटे को नोटिस जारी किया जाए। जवाब आने पर अगली सुनवाई की जाएगी।  
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