सुनवाई के बाद जस्टिस शबीहुल हसनैन और जस्टिस राजन रॉय ने कहा कि एक बेटे की मां को अपने जीवनयापन के सहारे लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
दुकान उनके पति को आवंटित हुई थी, लेकिन बेटे के नाम हो गई। बेटे को दुकान आवंटित किए जाने पर जैनब ने रेलवे को शिकायत की थी, लेकिन विभाग ने चलताऊ ढंग से बिना मामले की गहराई में गए आदेश जारी कर दिया।
दुकान उनके बेटे को आवंटित करते समय जैनब को उचित ढंग से सूचना नहीं दी गई। जो सूचना दी गई, वह पुराने पते पर भेजी गई, जहां वे नहीं रहतीं।
अदालत ने कहा, प्रथम दृष्टया लगता है कि जैनब का बेटा सही दस्तावेजों के साथ रेलवे अधिकारियों के पास नहीं पहुंचा था। फिर भी उसे बिना उचित जांच किए चलताऊ तरीके से लाइसेंस आवंटित कर दिया गया? ऐसे में बेटे को नोटिस जारी किया जाए। जवाब आने पर अगली सुनवाई की जाएगी।