जरा सोचिए, मरीजों को अस्पताल पहुंचने के बाद अगर अपनी बीमारी से कम और वहां मौजूद कनखजूर-कॉकरोच से ज्यादा डर लगे तो उस अस्पताल की सफाई व्यवस्था का खुद ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
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सिविल अस्पताल में दवा छिड़कने के बाद निकले क्रॉकोच
- फोटो : amar ujala
कुछ ऐसा ही हाल सिविल अस्पताल में देखने को मिल रहा है। सफ ाई पर हर साल लाखों रुपये फूंकने के बाद भी यहां कनखजूर-कॉकरोच की वजह से मरीज और उनके तीमारदार दहशत में हैं।
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कॉक्रोच
- फोटो : amar ujala
रात में यहां भर्ती मरीजों की तब नींद उड़ जाती है, वार्ड में फर्श से लेकर बेड तक कॉकरोच धमाचौकड़ी मचाने लगते हैं। सरकारी अस्पतालों में सफाई-कॉकरोच व कीड़े मकोड़े मारने का ठेका निजी संस्था को दे रखा है जो लापरवाही बरत रही है। ऐसे में कॉकरोच व कीड़े-मकोड़े अस्पतालों में बढ़ते जा रहे हैं।
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सिविल अस्पताल में निकला कनखजूरा
- फोटो : amar ujala
बुधवार को वॉर्डो में कॉकरोच होने की शिकायत पर दवा का छिड़काव कराया गया। इमरजेंसी व इमरजेंसी बर्न यूनिट में हजारों कॉकरोच निकलकर बाहर आ गए। कनखजूर तक एक मरीज के बेड पर रेंगता मिला। इससे वहां पर हड़कंप मच गया।
कॉकरोच की वजह से हो सकती हैं ये बीमारियां
- टॉयफाइड, कॉलरा, कुष्ठ रोग, प्लेग, पेट में संक्रमण।
नियमित होती है सफाई
वार्ड मे सफाई के साथ समय-समय पर कीटनाशक का छिड़काव होता है ताकि कॉकरोच व कीड़े हटाए जा सके। जिस वार्ड में कीड़े होने की शिकायत आती है वहां पर दवाओं का छिड़काव कराया जाता है। - डॉ. हिम्मत सिंह दानू, निदेशक- सिविल अस्पताल