छठ पूजा के तीसरे दिन लोगों ने गोमती के किनारे अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया। यहां हैं नदी के किनारे की तस्वीरें...
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छठ पूजा से पूरी होती है हर मनोकामना, जानें महत्व
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छठ पूजा के तीसरे दिन मंगलवार को श्रद्धालुओं ने नदी के तट पर अस्त होते सूर्य को पहला अर्घ्य दिया। इस दिन श्रद्धालु निर्जला व्रत रखते हैं। षष्ठी की सांयकाल बेला में डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही पारंपरिक पकवान अर्पित किए गए।
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सूर्य उपासना और माता छठी के पूजन का महापर्व इन दिनों विधि-विधान से मनाया जा रहा है। अपने पाल्यों की समृद्धि एवं मंगलकामना के लिए की जाने वाली छठ पूजा में व्रत के दौरान पवित्रता का खास ख्याल रखा जाता है।
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चार दिनों के इस अनुष्ठान में प्रत्येक दिन अलग-अलग ढंग से पूजा का विधान है। छठ पूजा की महत्ता और इसमें लोगों की आस्था का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पूरा परिवार मिलकर पूजन-अर्चन करता है।
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मान्यता है कि महाभारत काल से छठ पूजा शुरू हुई। धीरे-धीरे इसका महत्व समझने के साथ चलन बढ़ता गया।
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मौजूदा दौर में छठ पूजा ने वृहद रूप ले लिया है। श्रद्धालुओं का मानना है कि छठ पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
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चार दिवसीय पूजा कार्यक्रम में 72 घंटे का व्रत रखा जाता है। जिसमें 36 घंटे निर्जला व्रत रखने का विधान है। चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत की समाप्ति होती है।
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छठ पूजा की षष्ठी पर मंगलवार को श्रद्धालुओं ने निर्जला व्रत रखा। शाम के समय गोमती नदी के तट पर पहुंचकर श्रद्धालुओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया।
छठ पूजा में सप्तमी को चौथे दिन बुधवार को प्रात: काल उगते सूर्य को अर्घ्य देकर श्रद्धालु अपने व्रत का पारण करेंगे। उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही छठ पूजा के लोक महापर्व का समापन हो जाएगा।