डालाछठ के अवसर पर गुरुवार को महिलाएं गोमती के तट पर एकत्रित हुईं। महिलाओं ने अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को नमन करते हुए अर्घ्य दिया। पुत्रों के दीर्घायु होने के साथ ही परिवार के सुख समृद्धि की भी कामना करते हुए लोकगीतों के माध्यम सूर्य की उपासना करते हुए परंपरा का निर्वहन किया।
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छठ पर्व
छठी मइया से पुकार, चमकै अंचरा सेंदुरवा, छठी मइया नीके राखेव, हमरा घर और दुअरवा लोकगीतों से नदी, तालाब और नहरों के तट गूंजते रहे। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शहर, कस्बों व ग्रामीण अंचलों में जगह-जगह भगवान सूर्य की पूजा की गई। अस्ताचलगामी सूर्य की उपासना के कारण पूजा स्थलों पर मेले सा माहौल रहा।
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छठ पर्व
डाला छठ को सूर्य षष्ठी का पर्व भी कहा जाता है। गुरुवार को पर्व के तीसरे दिन शाम ढलते ही शहर, गांव और कस्बो में पूजित तालाब, नदियों व नहर के तट पर महिलाएं पूजा का थाल सजाकर पहुंच गईं। महिलाओं ने ओम भाष्करायनम: का जप करते हुए भगवान सूर्य को नमन कर घुटने तक पानी में खड़े होकर जल का तर्पण किया।
इसके बाद बांस के सूप में रखे फल, सब्जी और गन्ने का अर्पण कर भगवान सूर्य से अक्षय सुहाग के साथ पुत्र के दीर्घायु होने की कामना की। सुख समृद्धि का भी वरदान मांगा।