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कैट में फिर छाए इंजीनियर, टॉप-20 पर लड़कों का कब्जा

Tue, 10 Jan 2017 10:37 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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भारतीय प्रबंध संस्‍थान (आईआईएम) बंगलूरू ने सोमवार को कॉमन एप्टीट्यूड टेस्ट (कैट)-2016 का परिणाम जारी कर दिया गया है। इस बार भी कैट में इंजीनियर्स का ही जलवा रहा और पहले 20 स्‍थानों पर सभी अभ्यर्थी इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से हैं। कैट-2016 के संयोजक प्रो. राजेंद्र कुमार बांडी ने बताया कि इन अभ्यर्थियों को ओवरऑल 100 पर्सेंटाइल मिले हैं। लखनऊ के टॉपर्स में भी सभी इंजीनियरिंग कोर्स के विद्याथी हैं।

लखनऊ के होनहारों ने कॉमन एडमिशन टेस्ट में शानदार प्रदर्शन किया है। 30 से अधिक विद्यार्थियों ने 99 से अधिक परर्सेंटाइल हासिल करते हुए यह आशा जगाई है कि देश के प्रमुख भारतीय प्रबंधन संस्थानों में एडमिशन के लिए अगले चरण में उन्हें आमंत्रित किया गया जाएगा।

सैकड़ों विद्यार्थियों ने 95 से अधिक पर्सेंटाइल हासिल किए हैं जिसकी वजह से उन्हें 20 आईआईएम से कॉल आए न आए, अन्य  प्रमुख संस्थानों में एडमिशन का मौका उन्हें जरूर मिल सकेगा। राजधानी से पुलकित सचान 99.73, अनन्या वत्स 99.64, राहुल श्रीवास्तव 99.62 और देवांग 99.58 पर्सेंटाइल अंक हासिल कर राजधानी के टॉप स्कोरर्स में शामिल हुए।
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अनन्या वत्स : फाइनल ईयर में चार घंटे की तैयारी
स्कोर : 99.64

माता-पिता : शालिनी-हाउसवाइफ व पंकज वत्स- केंद्रीय कर्मचारी

सफलता पर : मुझे अच्छे स्कोर की पूरी उम्मीद थी। मैंने आईईटी लखनऊ से बीटेक फाइनल ईयर पास कर कोर्स पूरा किया है। थर्ड ईयर के दौरान ही एमबीए करने का निर्णय लिया था। इसकी तैयारी के लिए फाइनल ईयर में हर रोज तीन से चार घंटे दिए और आखिरी दौर में अपनी कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई के बजाय फोकस कैट पर ले आईं।

लक्ष्य : देश के टॉप संस्थान से एमबीए कर बीटेक डिग्री के जरिए बेहतर जॉब का लक्ष्य।
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देवांग श्रीवास्तव : दूसरे प्रयास में शानदार स्कोर
स्कोर : 99.58

माता-पिता : अनीता श्रीवास्तव- हाउस वाइफ व पिता सुधीर कुमार- एचएएल में इंजीनियर

सफलता पर : एनआईटी जयपुर से 2016 में केमिकल इंजीनियरिंग पूरी कर चुका हूं। कैट में यह दूसरा प्रयास था। पिछले वर्ष 97 परर्सेंटाइल स्कोर किया था, जिसमें मनचाहा संस्थान नहीं मिला, इसलिए फिर से कोशिश की।

लक्ष्य : श्रेष्ठ संस्थान में एडमिशन लेकर कोर्स पूरा करना और कॉरपोरेट सेक्टर में खुद को स्थापित करना। इसके लिए अगले राउंड की कॉल का वेट कर रहा हूं।

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सिद्धार्थ गौतम : 10 माह की मेहनत का फल
स्कोर : 99.39

माता-पिता : रूपरेखा- टीचर और पिता कमलेश गौतम- कारोबारी

सफलता पर : यह पहला प्रयास था। आईईटी सिविल इंजीनियरिंग फाइनल ईयर है और जल्द यह कोर्स पूरा करने पर देश के नामी मैनेजमेंट संस्थान में एडमिशन लेने की चाह।

लक्ष्य : 2016 में फरवरी से कैट की तैयारी शुरू की थी। 10 महीने की मेहनत रंग लाई। चाहूंगा कि जीडी-पीआई में अच्छा प्रदर्शन कर एडमिशन हासिल करूं। फिलहाल अगले चरण के लिए आईआईएम कोझीकोड से कॉल आ चुका है, बाकी देख रहे हूं कि कहां और जाना होगा।
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आयुषी शर्मा : जॉब छोड़कर की थी कैट की तैयारी
स्कोर : 99.07

माता-पिता : शीला शर्मा-होममेकर व प्रवेश आनंद शर्मा - एलआईसी

सफलता पर : साल 2015 में आईटी में इंजीनियरिंग करने के बाद सॉफ्टवेयर कंपनी जॉइन कर ली थी लेकिन कुछ महीने काम करने के बाद महसूस हुआ कि मैं जैसा काम करना चाहती हैं, यहां नहीं कर पाऊंगी। जॉब छोड़ी और कैट की तैयारी में जुट गई। अब मिले शानदार स्कोर को पहला एक चरण मानती हूं और बेहतर संस्था से एमबीए कर आगे बढ़ना चाहती हूं।

लक्ष्य : कॉरपोरेट लाइफ अट्रैक्ट करती है और खुद को इस क्षेत्र में स्थापित करना चाहती हूं।
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शायन अहमद खान : जॉब में संतोष नहीं मिला
स्कोर : 99.14

माता-पिता : आफरीन खान-होम मेकर और इश्तियाक अहमद - मर्चेंट नेवी में कैप्टन।

सफलता पर : पूरी उम्मीद थी कि अच्छा स्कोर करूंगा। डीयू से मैथ्स, फिजिक्स और कंप्यूटर साइंस में 2015 बीएससी करने के बाद डेलॉइट कंपनी में जॉब शुरू की। लेकिन कॅरिअर ग्रोथ के लिए कैट ही अच्छा विकल्प नजर आया।

लक्ष्य : एमबीए करके भविष्य में खुद को कॅरिअर के लिहाज से बेहतर मुकाम पर देखना चाहता हूं।
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सोमिल कुमार : महत्वाकांक्षा है बड़ी
स्कोर : 99.15

माता-पिता : पुष्पा शाह शिक्षिका और रामानंद प्रसाद- डीआरडीओ में क्लास वन अफसर।

सफलता पर : 2016 में बीटेक बीआईईटी झांसी से इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन किया और कैंपस प्लेसमेंट में 3.5 लाख का विप्रो में जॉब ऑफर मिला था। लेकिन इसे स्वीकारा नहीं क्योंकि इससे अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा होता नहीं पा रहा था। फाइनल ईयर में खुद को परखने के लिए कैट दिया था। इस दफा पूरी तैयारी की, और सफलता मिलने पर खुश हूं।

लक्ष्य : छह माह कैट की तैयारी की, अब कुछ हफ्ते जीडी-पीआई राउंड को दूंगा, फिलहाल उसी पर फोकस है।

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अंशुमन सिंह : सफलता के लिए रेगुलर स्टडी जरूरी
स्कोर : 99.88

माता-पिता : आरके सिंह, निजी विश्वविद्यालय में सिक्योरिटी ऑफिसर-मां, हाउसवाइफ

सफलता पर : अहमदाबाद के अंशुमन ने जोधपुर आईईटी (इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेकभनोलॉजी) से इसी साल बीटेक फाइनल किया है। वह बताते हैं कि उनकी सफलता में सबसे अधिक योगदान उनके  परिवार का है। उनका कहना है कि वह 3 से 4 घंटे नियमित रूप से पढ़ाई करते हैं। कैट एक्जाम में सफलता पाने के लिए सप्ताह में 2 से 3 पेपर जरूर सॉल्व करते थे।

भविष्य के लक्ष्य : एमबीए के लिए अहमदाबाद आईआईएम में एडमिशन चाहता हूं। इस फील्ड में तैयारी करने वालों के जरूरी है कि दिन भर में कम से कम तीन से चार घंटे नियमित रूप से पढ़ाई की जाए। साथ ही सफलता के लिए मॉक पेपर सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं।

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उत्कर्ष बख्शी : मॉक टेस्ट सीरीज व पढ़ाई में कांटिन्यूटी ने दिलाई सफलता
स्कोर : 99.86

माता-पिता : विनय कुमार, लॉयर- मां, हाउसवाइफ

सफलता पर : बस्ती के उत्कर्ष बख्शी ने इसी सत्र में लखनऊ आईईटी से बीटेक फाईनल किया है। उत्कर्ष बताते हैं कि उन्होंने बीटेक थर्ड इयर से ही कोचिंग शुरू कर दी थी। पहले प्रयास में ही सफलता हासिल की। उनका मानना है कि पढ़ाई के साथ साथ मॉक् टेस्ट को रेगुलर सॉल्व करना बेहद जरूरी है। इससे प्रैक्टिस केसाथ ही प्रेपरेशन लेवल का भी पता चल जाता है।

भविष्य के लक्ष्य : एमबीए पूरा कर के अपना बिजनेस शुरू करना है। पहले ही प्रयास में सफलता मिलने पर काफी खुशी हुई। जो लोग कैट ही नहीं किसी भी प्रतियोगिता की तैयारी कर रहे हैं उनकेलिए जरूरी है कि वह नियमित रूप से पढ़ाई करें। साथ ही टेस्ट सीरीज सॉल्व करना काफी हेल्पफुल होता है।

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आशीष सिंह : फोकस्ड स्टडी से ही प्राप्त हो सकता है लक्ष्य
स्कोर : 99.79

माता-पिता : राजेंद्र कुमार सिंह, मां-हाउसवाइफ

सफलता पर : रायबरेली के आशीष सिंह ने उत्तराखंड से इसी साल बीटेक फाइनल किया है। आशीष बताते हैं कि उन्होनें बचपन से ही एमबीए करने का सोच रखा था। लक्ष्य निर्धारित होने की वजह से जल्द ही सफलता भी मिल गई।

भविष्य के लक्ष्य : एमबीए पूरा कर के एंटरप्रिन्योर बनने के सपने को पूरा करना है। उनका कहना है कि सफलता कि लिए जरूरी है कि लक्ष्य निर्धारित हो। अगर एम क्लियर हो तो स्टडी भी फोकस्ड होती है। इससे आसानी से सफलता प्राप्त की जा सकती है।

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सार्थक आनंद : किसी भी प्रतियोगिता के लिए टाइम मैनेजमेंट सबसे अहम
स्कोर : 98.12

माता-पिता : राजीव सक्सेना, सरकारी नौकरी, मां- टीचर

सफलता पर : अलीगंज के सार्थक आनंद आईईटी से बीटेक फाइनल इयर के छात्र हैं। सफलता पर बेहद खुशी जताते हुए सार्थक कहते हैं कि वह अपने शहर से ही एमबीए करना चाहेंगे। उनका मानना है कि सफलता में सबसे अहम भूमिका समय मैनेजमेंट की होती है।

भविष्य के लक्ष्य : एमबीए फाइनल कर एंटरप्रीन्योर बनना हैं। अपनी सफलता के मंत्र बताते हुए साथर्क कहते हैं कि प्रतियोगित में सबसे अहम भूमिका टाइम मैनेजमेंट की होती है। पढ़ाई करने के बाद भी अगर समय मैनेजमेंट सही नहीं है तो सफलता मिल पाना मुश्किल होता है। तैयारी कर रहे छात्र सबसे पहले समय मैजेनमेंट पर फोकस करें।
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राजकुमार श्रीवास्तव : टेस्ट सीरीज, प्रैक्टिस के  साथ अर्ली प्रिपरेशन भी महत्वपूर्ण
स्कोर : 99.62

माता-पिता : मयंक आर्यन- एफसीआई से रिटायर्ड , मां- एफसीआई से रिटायर्ड

सफलता पर : आलमबाग के राजकुमार ने आईआईटी बनरस से बीटेक व सेक्चरर में एमटेक किया है। राजकुमार का मानना है क ी सफलता के लिए टेस्ट सीरीज सॉल्व करना व प्रैक्टिस करना जरूरी है।

भविष्य के लक्ष्य : हमेशा से ही मैनेजमेंट में जाने के बारे में सोचा था। इसलिए एमटेक के बाद एमबीए करने का सोचा। राजकुमार का मानना है कि अगर जल्दी सफल होने की चाह है तो जरूरी है कि इर्ली प्रेपरेशन भी शुरू कर दी जाए।
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