लखनऊ में निराला नगर स्थित इंडिया हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर की कारस्तानी ने एक जिंदा मरीज को कब्र तक पहुंचा दिया। जिस मरीज को आईसीयू में भर्ती कर नौ दिन तक इलाज दिया गया, उसे डॉक्टरों ने सोमवार को अचानक मृत घोषित कर दिया गया। पीड़ित परिवार का साफ कहना है कि छह लाख रुपये वसूलने के बाद जब अस्पताल को पता चला कि उनके पास मोटी रकम नहीं बची, तो उन्होंने मरीज को मृत घोषित कर दिया। इस बारे में जब अस्पताल के संचालक डॉ. रफीक से पूछा गया तो उन्होंने सफाई दी कि परिवार खुद मरीज को ले गया था, डॉक्टरों ने मृत घोषित नहीं किया था। लेकिन सवाल ये है कि अगर मरीज को मृत घोषित नहीं किया गया था तो फिर कोई अपने बेटे को जिंदा दफनाने की तैयारी क्यों करेगा।