भागमभाग भरी जिंदगी और अकेलापन युवाओं को अवसाद की ओर ले जा रहा है। यही वजह है कि युवाओं में अवसाद का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञ इसके पीछे सामाजिक कारण को ज्यादा जिम्मेदार मानते हैं।
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अवसाद के मरीजों में युवाओं की तादात तेजी से बढ़ रही है। करीब 50 फीसदी मरीज 35 से 60 साल के बीच के हैं। इसमें 35 से 45 की उम्र वालों की संख्या ज्यादा है। केजीएमयू के मानसिक चिकित्सा विभाग की ओपीडी और भर्ती होने वाले मरीजों के आंकड़े इसकी पुष्टि करते हैं। इतना ही नहीं केजीएमयू में सेंटर फॉर एडवांस रिसर्च ट्रेनिंग एंड सर्विसेज (कार्ट्स) एवं लखनऊ एल्डर्स स्टडी (लेस) के आंकड़े भी कुछ इसी ओर इशारा करते हैं।
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चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि हर किसी के पास वक्त की कमी है। परिवार के बीच कम बातचीत होने एवं सोशल मीडिया भी अवसाद की एक वजह बनी है। तमाम मरीजों से बातचीत में पता चला है कि वे देर रात तक मोबाइल पर लगे रहते हैं। इस वजह से उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती। धीरे-धीरे वे अवसाद की ओर बढ़ जाते हैं। केजीएमयू से जुड़ी संस्था कार्ट्स एवं लेस की ओर से लखनऊ के अलग-अलग इलाके में किए गए सर्वे में यह बात सामने आई है कि 45 से 59 आयु वर्ग में 50 फीसदी लोगों में अवसाद की बीमारी पाई गई है।
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....इसलिए हैं अवसाद में केस-1
नहीं मिली नौकरी, कोचिंग भी हो गया बंद
रमेश (परिवर्तित नाम) के माता-पिता दोनों इंटर कॉलेज में प्रवक्ता है। वह शुरू से ही अकेला रहा है। अंग्रेजी में परास्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद भी नौकरी नहीं मिली। कुछ दिन कोचिंग सेंटर चलाया, लेकिन बाद में बंद हो गई अब वह अवसाद का शिकार है। केजीएमयू के मानसिक चिकित्सा विभाग में इलाज चल रहा है।
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केस 2 टीचर बनना चाहती थीं, कर रहीं मेडिकल की तैयारी
रागिनी (बदला हुआ नाम) डॉक्टर बनने की तैयारी कर रही थी। वह नीट सहित अन्य मेडिकल की प्रवेश परीक्षाओं में बैठ चुकी है, लेकिन सफलता नहीं मिली। पिछले छह माह से उसका अवसाद का इलाज चल रहा है। इलाज के दौरान काउंसलिंग में पता चला कि वो डॉक्टर के बजाए अध्यापिका बनना चाहती थीं।
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ-
अकेलेपन से भी बचना होगा
अवसाद की कई वजह होती हैं। मानसिक विकास न होना, दवाओं का दुष्प्रभाव के साथ ही एक बड़ी वजह सामाजिक है। युवाओं में अवसाद का सबसे प्रमुख कारण भागमभाग भरी जिंदगी है। पारिवारिक अकेलापन और ज्यादा पैसा कमाने की ललक भी अवसाद की ओर बढ़ाती है। गलत संगत और नशीले पदार्थ का सेवन भी बड़ा कारण है। इससे बचने के लिए परिवार व दोस्तों के बीच खुले तौर पर बातचीत होना जरूरी है। किसी भी समस्या पर मिल बैठकर निपटाने की कोशिश हो तो अवसाद से बचा जा सकता है। - प्रो. प्रनोब कुमार, अध्यक्ष, मानसिक चिकित्सा विभाग केजीएमयू
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मोबाइल भी अवसाद की बड़ी वजह
मोबाइल भी अवसाद की बड़ी वजह बन रहा है। युवा रात में सोने के बजाए सोशल मीडिया व गेम खेलने में व्यस्त रहते हैं। नींद पूरी नहीं होती है। ज्यादा से ज्यादा हासिल करने की महत्वकांक्षा भी उन्हें अवसाद की ओर ले जाती है। - प्रो. एससी तिवारी, विभागाध्यक्ष, जिरियाट्रिक मेंटल हेल्थ, केजीएमयू
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पहचानें लक्षण - चेहरे पर उदासी
- किसी भी काम में मन न लगना
- किसी तरह की खुशी न होना
- गम में भी सामान्य बर्ताव
- हर समय नकारात्मक बात करना
- नींद न आना
- नींद आने पर अचानक खुल जाना
ऐसे करें बचाव
- कोई आपके बारे में नकारात्मक सोच रहा है तो उस पर ध्यान न देना
- हमेशा खुश रहने की कोशिश करना
- भरपूर नींद लेना
- समय से पौष्टिक भोजन करना
- किसी तरह का तनाव हो तो परिवार व दोस्तों के बीच शेयर करना
- महत्वाकांक्षा उतनी ही रखें जितना हासिल होना संभव हो