जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आखिर जिले में और भी साखदार स्कूल थे, उन्हें परीक्षा केंद्र क्यो नहीं बनाया? यदि भौतिक संसाधनों का अभाव था और जिसके कारण टाट-पट्टी का इंतजाम करना पड़ा, उस पर डायट का ध्यान क्यो नहीं गया?
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तस्वीरें: होने वाले टीचर्स ने अपनी परीक्षा में की जमकर नकल
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यूपी के बच्चों का भविष्य वाकई खतरे में है। जरा तस्वीरों में देखें, होने वाले टीचर्स कैसे जमकर एक-दूसरे की नकल कर रहे हैं...
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भविष्य के शिक्षकों ने मंगलवार की सुबह की पाली में हुई बीटीसी परीक्षा में जमकर नकल की। फैजाबाद में बीटीसी के छात्र/छात्राओं ने टाट-पट्टी पर बैठकर इग्जाम दिया और एक दूसरे की खूब टीप मारी।
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शिक्षक बनने के लिए बीटीसी होना अनिवार्य योग्यता है। नकल कर पास हुए इन्हीं परीक्षार्थी के कंधे पर देश के भविष्य का निर्माण करने की भी जिम्मेदारी होगी। बीटीसी 2013 की प्रथम सेमेस्टर की मंडल स्तरीय तीन दिवसीय परीक्षा 17 नवंबर को सुबह 10 बजे शहर स्थित साहबदीन सीताराम इंटर कालेज में शुरू हुई।
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कुल परीक्षार्थियों की तादात 627 है जिसमें से 159 परीक्षार्थी आंशिक श्रेणी के है। आंशिक उसे कहते है जो पिछली परीक्षा में किन्हीं कारण से असफल रहे हो, उन्हें दूसरी बार भी मौका दिया जाता है। कमरों में टाट-पट्टी बिछी मिली।
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परीक्षार्थी सटकर बैठ गए जिससे एक दूसरे की नकल करने में कोई असुविधा न हो। परीक्षा की शुचिता को तार-तार कर दिया। 627 परीक्षार्थियों के लिए सिर्फ एक परीक्षा केंद्र बना देने से डायट पर भी संदेह की अंगुली उठ रही है। समूचे मंडल के बीटीसी कर रहे छात्र/छात्राओं की संख्या को देखते हुए और भी परीक्षा केंद्र बनाए जा सकते थे।