विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रदेश की वाइल्डलाइफ को दर्जनों की संख्या में घड़ियाल के बच्चों का तोहफा मिला है।
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कुकरैल स्थित घड़ियाल पुनर्वास केंद्र में रविवार सुबह अपनी हैचिंग के लगभग दो महीने पूरे कर चुके घड़ियाल के सवा सौ से अधिक की संख्या में नन्हे मेहमान विशेषज्ञों की देखरेख में बाहर आये। करीब दो महीने से स्पेशल चैंबर में बालू में दबे इन अंडों से शनिवार शाम से ही आवाजें सुनाई देनें लगी थीं।
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जिसके बाद से अधिकारियों ने अगले 12-16 घंटों में उनके बाहर आने की तैयारियां शुरू कीं। लुप्तप्राय परियोजना के वरिष्ठ अधिकारियों, डीएफओ अवध श्रद्धा यादव समेत विशेषज्ञों की देखरेख में करीब पौने घंटे में हैचिंग प्लेस से अंडों से बच्चे बालू की परत हटाते ही बाहर आये।
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परत हटते ही और हाथ लगते ही कुलबुलाते हुये अंडों की छिल्के तोड़कर बाहर आये 4-5 इंच से अधिक लंबाई के नन्हे मेहमानों ने धमाचौकड़ी शुरू कर दी। स्टाफ ने उन्हें बाद में पानी केपांड में शिफ्ट किया। वन संरक्षक लुप्तप्राय रेनु सिंह ने बताया कि 126 अंडों से सकुशल बच्चे बाहर आये हैं।
अधिकारियों ने बताया कि यहां वे अगले 12-15 दिनों तक देखभाल में रहेंगे। इस दौरान उनके पेट में मौजूद उनका कुदरती आहार ही उनका पोषण करेगा। उसके बाद उन्हें छोटी मछलियों की खुराक दी जायेगी। करीब 20-22 महीने की उम्र के बाद उन्हें सुरक्षित घाट-जल धाराओं में रिलीव किया जायेगा।