अमर उजाला के घर-घर कान्हा कार्यक्रम में हर कान्हा के रूप में एक सम्मोहन था। यह शायद भगवान कृष्ण का रूप रखने का ही परिणाम था कि इन बच्चों के चेहरे से एक तेज झलक रहा था।
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क्या सम्मोहक रुप बनाकर आए थे कान्हा, देखेंगे तो रीझ जाएंगे
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अमर उजाला लखनऊ द्वारा लगातार चौथे साल घर घर कान्हा कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में शहर भर से महिलाएं अपने एक से तीन साल तक के बच्चे को यहां लेकर आईं।
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हर बच्चे के रूप में एक अलग किस्म का सम्मोहन दिख रहा था। मानों कृष्ण के असली रूप वही हों।
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इन सभी बच्चों की पोशाक के साथ इनका अद्भुत सौंदर्य देखता ही बनता था।
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इस कार्यक्रम में एक से पांच साल तक के बच्चों को शामिल किया गया। बेबी और बाबा दोनों ही घर-घर कान्हा कार्यक्रम में बुलाए गए।
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चूंकि कृष्ण ऐसे भगवान हैं जिनका श्रृंगार स्त्री और पुरुष दोनों रूप में हो सकता है।
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श्रृंगार की यह खास बात इन बच्चों के गेटअप में देखने को मिली।
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कार्यक्रम में अलग-अलग थीम रखी गई थीं। सबसे छोटे कान्हा से लेकर सबसे गोल मटोल कान्हा को मंच पर आमंत्रित किया गया।
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कुछ बाल गोपाल खुद चलकर आए तो कुछ को लेकर उनकी माताएं आईं।
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इन बच्चों की तरफ से अलग-अलग तरह की रचनात्मकता भी पेश की गई।
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कुछ ने गाकर सुनाया तो कुछ ने ठुमककर दिखाया। जब मंच पर यह कार्यक्रम चल रहा था तो कुछ नन्हें अपने ही खेलों में मगन हो गए।
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उनकी बदमाशियां ऐसी थीं कि उन पर सिर्फ हंसा जा सके।
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अब तक एक-दूसरे से दोस्ती कर चुके इन बच्चों ने शरारत भी एक-दूसरे से ही की।
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मंच पर जब कार्यक्रम चल रहा था तो यह बच्चे किसी दूसरे बच्चे के हाथ में बैलून देखकर मचल रहे थे।
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बच्चों के साथ उनकी मम्मियों का भी उत्साह देखते हुए बनता था।
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महिलाओं के लिए इस कार्यक्रम में आने की कोई ड्रेस थीम तो रखी नहीं गई थी लेकिन सभी महिलाएं एक खास गेटअप में नजर आईं।
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कार्यक्रम में अपने कान्हा के साथ आई एक महिला।
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इस कार्यक्रम में कुछ जुड़वा बच्चे भी कृष्ण का वेष बनाकर आए।
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ये बच्चे सबके लिए कौतूहल का विषय रहे। हर कोई इन नन्हें कृष्णों को प्यार करना चाह रहा था।