बिछिया (बहराइच)। भारी वर्षा से प्रदेश के समाज कल्याण राज्यमंत्री बंशीधर बौद्ध का कच्चा मकान गिरने के अगले दिन प्रशासन ने उसका संज्ञान लिया।
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मकान गिरने और राज्यमंत्री व परिवारीजनों द्वारा मलबा हटाए जाने संबंधी खबर अमर उजाला में सोमवार के अंक में प्रकाशित होने के बाद अफसर आनन-फानन में गांव पहुंचे।
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एसडीएम ने दो घंटे तक राज्यमंत्री के मकान का मुआयना किया। फोटोग्राफी करवाई। मुआवजे की पेशकश की जिससे राज्यमंत्री ने इंकार कर दिया।
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प्रदेश समाज कल्याण राज्यमंत्री बंशीधर बौद्ध का मकान कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के नई बस्ती टेड़िया गांव में है। उनके बडे़ पुत्र मिहींपुरवा में रहते हैं लेकिन राज्यमंत्री ने गांव नहीं छोड़ा है।
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शुक्रवार रात भारी बारिश में उनके मकान का एक हिस्सा ढह गया। मकान के दूसरे हिस्से में मौजूद राज्यमंत्री, पत्नी रज्जोदेवी व तीन पुत्र बाल-बाल बच गए। गृहस्थी सामान मलबे में दबकर खराब हो गया।
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शनिवार को प्रशासन के अधिकारियों ने इस हादसे का संज्ञान नहीं लिया। अमर उजाला ने रविवार के अंक में खबर को प्रमुखता से छापा तो प्रशासन में हड़कंप मचा। शासन ने मामले में जवाब तलब किया। (घर ढह जानें पर बंशीधर ने खुद मलबा हटाया था।)
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इस पर डीएम अभय कुमार ने एसडीएम नानपारा अमिताभ यादव को रविवार सुबह अमले के साथ गांव भेजा। उन्होंने राज्यमंत्री के ढहे मकान का मुआयना किया और फोटोग्राफी करवाई। उन्होंने मुआवजे की पेशकश की।
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राज्यमंत्री बंशीधर बौद्ध ने मुआवजा लेने से इंकार कर दिया। बोले कि जो मुआवजा हमें देना है, उसे उन ग्रामीणों को प्रदान करें जिनका वर्षा के दौरान नुकसान हुआ है। इसके बाद एसडीएम बैरंग लौट गए।
तो मिलता सिर्फ सात हजार मुआवजा
अगर राज्यमंत्री मुआवजा लेने के लिए हामी भरते तो उन्हें सिर्फ सात हजार रुपये दैवीय आपदा राहत कोष से मिल सकता था। क्योंकि कच्चा मकान ढहने पर इससे अधिक मुआवजा नहीं दिया जा सकता।