सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या आने वाला हर भक्त रामलला के दर्शन को जाना चाहता है। मगर अपने आराध्य तक पहुंचने में भक्तों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। रास्तेभर जेल की तरह शिकंजे लगे हैं। तय अवधि में ही दर्शन होता है तो दर्शन मार्ग पर न कहीं बैठने की जगह न चाय-जलपान व प्रसाधन की व्यवस्था। दर्शन के बाद वापस निकलने के लिए करीब एक किलोमीटर की लंबी दूरी पर तय करनी पड़ती है। रामलला के दर्शन की अवधि भी सीमित व निर्धारित है। सुबह 7 से 11 व दोपहर 1 बजे से 5 बजे तक ही रामलला का दर्शन होता है। रामलला इतने दूर विराजे हैं कि उन्हें देखना भी मुश्किल होता है।
Trending Videos
विज्ञापन
2 of 7
अयोध्या
- फोटो : अमर उजाला
पिछले 27 वर्षों से टेंट में रह रहे रामलला के दर्शन-पूजन का उत्साह सुप्रीम कोर्ट से आए फैसले के बाद बढ़ गया है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंचते हैं। हर श्रद्धालु की कामना रामलला के दर्शन की होती है। लेकिन कुछ रामलला के दर्शन मार्ग पर व्याप्त असुविधाएं, दर्शन का सीमित समय सहित अन्य समस्याओं के कारण नहीं जा पाते। रामलला के दर्शन के लिए भक्तों को रंगमहल मंदिर से प्रवेश करना होता है। यहां से कई स्थानों पर चेकिंग के बाद भक्त दर्शन को पहुंचते हैं।
विज्ञापन
3 of 7
अयोध्या पर फैसला
- फोटो : अमर उजाला
दूरी भी भक्तों से इतना ज्यादा है कि उन्हें नजरभर देखना भी मुश्किल होता है। आम दिनों में तो कुछ देर तक भक्त अपने आराध्य को निहार पाते हैं लेकिन मेला आदि के समय भीड़ होने पर रामलला के दर्शन टेढ़ीखीर बन जाता है। भक्त रंगमहल से प्रवेश कर करीब एक किलोमीटर की दूरी तय कर अमावां मंदिर के पीछे निकलते हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों को होती है। यात्रियों को दर्शन करने में तमाम समस्याएं आती हैं। दर्शन भी जूता पहन कर करना मजबूरी है। क्योंकि इसे उतारने का कहीं इंतजाम नहीं है।
4 of 7
अयोध्या में खुली दुकान
- फोटो : अमर उजाला
श्रद्धालु बोले अब जल्द होगी रामलला की रिहाई
रामलला के दर्शन का उत्साह श्रद्धालुओं में साफ नजर आता है। बड़ी संख्या में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं। महाराष्ट्र के श्रद्धालुओं का जत्था रामलला का दर्शन कर लौट रहा होता है। सतीश सिंपी कहते हैं कि बड़ी लंबी दूरी तय करनी पड़ी। प्रवेश कहीं और से और निकासी तो करीब एक किलोमीटर चलने पर हुआ है। आशा सिंपी ने बताया कि रामलला की स्थिति तो बहुत खराब है। ठीक से दर्शन भी नहीं हो पाते हैं।
विज्ञापन
5 of 7
श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
गुजरात के श्रद्धालु जगदीश सोमपुरा ने कहा कि रामलला को देखकर मन द्रवित हो उठा, वो तो जैसे जेल में हों। अब समय आ गया है उनकी रिहाई का। संजय कुमार भी रामलला के दर्शन कर लौटकर व्यवस्थाओं को लेकर क्षुब्ध थे। बताया कि दर्शन मार्ग की दूरी इतनी लंबी, रास्ते भर जेल की तरह शिकंजे लगे हैं, लेकिन सुविधाएं नदारद हैं। छाया ने कहा कि कहीं बैठने तक की व्यवस्था नहीं है दूर से ही रामलला का दर्शन हुआ ठीक से अपने प्रभु को निहार भी नहीं पायी।
विज्ञापन
6 of 7
फाइल फोटो
51 मीटर दूर से ही होते रामलला के दर्शन
रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास बताते हैं कि रामलला के दर्शन मार्ग पर भारी व्यवस्थाएं हैं। ऐसी व्यवस्था में रहते रामलला को 26 वर्ष गुजर रहे हैं। 51 मीटर की दूरी से ही भक्त रामलला के दर्शन कर प्रसाद चढ़ा सकते हैं। जहां दर्शन के लिए खड़ा होना है वहां भी बहुत ही सीमित जगह है, भक्त एक मिनट भी नहीं रुक पाते। रंगमहल से प्रवेश कर अमावां मंदिर तक करीब एक किलोमीटर की दूरी भी भक्तों को तय करनी पड़ती है। कहते हैं कि अब ये सब व्यवस्थाएं बदल जाएंगी। कुछ ही दिनों की बात है प्रभु राम नए मंदिर में विराजेंगे।
6475 श्रद्धालुओं ने किये दर्शन
मंगलवार को रामलला के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी लाइन लगी रही। दोनों पालियों को मिलाकर कुल 6475 श्रद्धालुओं ने रामलला के दरबार में हाजिरी लगाई। पहली पाली में जहां 3191 श्रद्धालुओं ने माथा टेका। वहीं दूसरी पाली में 3284 श्रद्धालुओं ने हाजिरी लगाकर पूजा अर्चन किया।