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60 साल बाद मिलीं सहेलियां, बोलीं- कभी सोचा भी नहीं था कि इंटरनेट का जमाना आएगा और हम फिर मिलेंगे

Tue, 26 Feb 2019 01:25 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
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एल्युमिनाई मीट - फोटो : अमर उजाला
60 साल पहले जब हम पास होकर स्कूल से निकले थे तो सोचा भी नहीं था कि कभी वापस मुलाकात होगी। इंटरनेट का जमाना आएगा और हम एक बार फिर से अपने ही स्कूल के उसी हॉल में एक साथ इकट्ठे होंगे, जहां घंटों मस्ती किया करते थे। एसेंबली हो, इवेंट हो या फिर डांस इस जगह से हमारी सबसे ज्यादा यादें जुड़ी हैं। खासकर स्कूल का वो पुराना गेट जहां हम सबसे नजरें चुराकर आइसक्रीम लेने जाते थे और पता चलने पर प्रिंसिपल और सिस्टर की डांट खाते थे। स्कूल के समय की कुछ ऐसी ही खूबसूरत और चटपटी यादें लॉरेटो कॉन्वेंट स्कूल की 1959 बैच की छात्रा दीपा कौल ने साझा कीं।
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एल्युमिनाई मीट - फोटो : amar ujala
वो 60 वर्षों बाद सोमवार को स्कूल में 1959 बैच की छात्राओं के लिए आयोजित एल्युमिनाई मीट में शामिल हुई थीं। 
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एल्युमिनाई मीट - फोटो : amar ujala
उनके अलावा इस बैच की करीब 16 एल्युमिना भी इसमें शामिल हुईं। कोई एक-दूसरे को देखकर हैरान थीं तो कुछ दौड़ कर गले लग गईं। किसी ने अपने स्कूल के बागीचे में गुजारे पल याद किए तो किसी ने सिस्टर की डांट, स्कूल का सख्त अनुशासन और नटखट मौज मस्ती के पलों को ताजा किया।

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एल्युमिनाई मीट - फोटो : amar ujala
कार्यक्रम की शुरुआत स्कूल प्रेयर से हुई। केक काटकर एल्युमिनाई स्टूडेंट्स ने अपनी खुशी का इजहार किया। इस मौके पर बचपन की उन तस्वीरों के वीडियो ने सभी का दिल छू लिया।
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एल्युमिनाई मीट - फोटो : amar ujala
जब छाया स्कूल ड्रेस में फोटो खिंचवाने का क्रेज
60 साल गुजर जाने के बावजूद स्कूल के समय का वो क्रेज आज भी छात्राओं में साफ नजर आ रहा था। खुद को स्कूल ड्रेस में देखने के लिए हर एल्युमिना उत्सुक थीं। स्कूल परिसर में लगे स्कूल यूनीफॉर्म की कटआउट स्टैंडी पर जैसे ही नजर गई तो सभी छात्राओं में उसके साथ फोटो खिंचवाने के लिए होड़ मच गई।
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एल्युमिनाई मीट - फोटो : amar ujala
बिछड़ चुकीं सहेलियों को याद कर हुईं गमजदा
एल्युमिनाई मीट में परवीन तल्हा ने अपनी सहेलियों पर लिखी कविता सुनाई। हर सहेली के व्यक्तित्व पर लिखी इस कविता को सुनकर सबके चेहरे खिल गए। जब जिक्र उन सहेलियों का आया जो अब इस दुनिया में नहीं हैं उनकी याद में सभी गमगीन हो गईं। गुजरी हुई सहेलियों के लिए दो मिनट का मौन रखा गया।
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एल्युमिनाई मीट - फोटो : amar ujala
बहुत सख्त था अनुशासन
स्कूल के समय हम सबने पढ़ाई के साथ मौज-मस्ती भी खूब की थी। वो समय हमारे लिए गोल्डन टाइम था। इस स्कूल में जो हमें पसंद नहीं आता था वो था यहां के अनुशासन और शिष्टाचार। यहां के नियम, कानून और समय की पाबंदी उस वक्त हमें जरा भी पसंद नहीं थी, लेकिन जब यहां से निकले तो हमें अपने स्कूल के इसी गुण की सबसे ज्यादा याद आई। आज हम 60 साल बाद एक-दूसरे के सामने हैं कभी सोचा भी नहीं था। 
- कुबू, निगहत व कृष्णा कुमारी

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एल्युमिनाई मीट - फोटो : amar ujala
नहीं भूलेगी वो एसेंबली
हमने सबसे ज्यादा याद इसी हॉल को किया, जहां आज हम सब इकट्ठा हैं। खासकर सुबह ‘श्री रामचंद भजनम्’ वाली वो हिंदी की प्रार्थना। हम सब शाम को इसी हॉल में इकट्ठे होते थे और घंटों डांस और मौज-मस्ती करते थे। स्कूल में समय की पाबंदी बहुत जरूरी हुआ करती थी। आज भी हमारी वो ही आदत है। यही वजह है कि आज भी लॉरेटो की स्टूडेंट का चाल-भाव, रहन-सहन और अंदाज से पता चल जाता है। - परवीन तल्हा, परवीन खान और दीपा कौल

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एल्युमिनाई मीट - फोटो : amar ujala
 फूलों के बीच करते थे पढ़ाई
आज भी हमारे स्कूल का बागीचा उतना ही खूबसूरत है। हमने सबसे ज्यादा याद इसी बागीचे को किया, जिनकी क्यारियों के बीच बैठकर हम घंटो पढ़ाई करते थे। फूलों के बीच बैठकर पढ़ाई करने का मजा ही कुछ और था। इसके अलावा हमें याद है कि हमारे पिछले गेट के पास आइसक्रीम और पूड़ी बिकती थी, जिसे खरीदने के लिए हमें स्कूल से सख्त मनाही थी। लेकिन हम सिस्टर और टीचर की नजर से बचते हुए गेट के अंदर से ही खरीद कर खाया करते थे। वो पल कभी नहीं भूल सकते। 
- मंजुल राजे व नलिनी जैन
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एल्युमिनाई मीट - फोटो : amar ujala
 एक्टिंग और सिंगिंग का शौक
स्कूल के नियम बड़े सख्त थे। समय की पाबंदी, सिस्टर की डांट, लेकिन हमें पढ़ाई के साथ मस्ती करने का बड़ा ही शौक था। पढ़ाई से ज्यादा हमारा मन एक्टिंग और सिंगिंग में लगता था। आज वर्षों बाद इस स्कूल में दोबारा वापसी हुई है, लेकिन अपनी फ्रेंड्स, अपना गार्डन, अपना हॉल यह बिल्डिंग देखकर ऐसा महसूस हो रहा है जैसे वो ही समय फिर वापस आ गया हो। 
- उषा सिंह व प्रभा शुक्ला 
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