कश्मीर में हिंसा करने वालों के बीच कुछ मददगार भी सामने आ रहे हैं। ऐसे ही एक मददगार अल्ताफ ने मनीगाम बेस कैंप में चल रहे लंगर में सिलेंडर व सब्जी की मदद पहुंचाई है। यही नहीं उन्होंने कहा है कि यात्रियों की सेवा में चल रहे लंगर में वह आगे भी मदद करते रहेंगे। मनीगाम में उक्त लंगर का आयोजन श्री अमरनाथ सेवा संस्थान, अमीनाबाद की ओर से कई वर्षों से किया जा रहा है।
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अमरनाथ यात्री
- फोटो : amar ujala
संस्थान के महासचिव ओमप्रकाश निगम ने अमर उजाला को बताया कि जब से कश्मीर में हिंसक वारदातें चल रही हैं, तब से बालटाल जाने वाले यात्रियों को सेना के सुरक्षा घेरे में रात में निकाला जा रहा है। चूंकि मनीगाम श्रीनगर व बालटाल के बीच सेंटर में है और सीआरपीएफ का बेस कैंप है, इसलिए वहां यात्रियों को रोका जाता है। इसीलिए इन दिनों वहां देश भर के यात्रियों का जत्था ठहर रहा है।
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इधर, बवाल के चलते लंगर का राशन व अन्य सामग्री लखनऊ से पहुंच नहीं पा रही। बुधवार को सिलेंडर खत्म हो गए और सब्जी भी कम पड़ गई। सेवादारों ने सूचना दी, तब वहां सुरक्षा बलों से मदद मांगी गई, लेकिन तात्कालिक कोई मदद नहीं मिल पा रही थी। ऐसे में वहीं मनीगाम से सटे हरीपुरा गांव के सरपंच अल्ताफ अहमद सूफी से बात हुई तो उन्होंने मदद देने का भरोसा दिया।
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अमरनाथ यात्री
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अल्ताफ ने करीब 15 गैस सिलेंडर गांव से जुटाकर उपलब्ध कराए। साथ ही बुधवार व बृहस्पतिवार को दोनों दिन खेतों से आलू मंगवाकर दिए हैं। उन्होंने यह मदद बेस कैंप के पीछे वाले गेट से मुहैया करायी है। कारण, हरीपुरा के विपरीत मनीगाम में अभद्र व्यवहार हो रहा है। वहां कुछ उपद्रवी मौका मिलने पर पत्थर चला रहे हैं। अल्ताफ के इस प्रयास को सभी सराह रहे हैं।
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- फोटो : amar ujala
हिंसा के बाद और कठिन हुई अमरनाथ यात्रा में यात्रियों को खाने-पीने की किसी प्रकार की दिक्कत न हो, इसके लिए लखनऊ के लंगर आयोजक पूरी कोशिश कर रहे हैं। अमरनाथ सेवा संस्थान के पदाधिकारी हरिकृष्ण रस्तोगी के साथ नौ सेवादारों का जत्था आज फ्लाइट से श्रीनगर रवाना हुआ है।
अमरनाथ यात्रा की दुश्वारियों का सामना करके आए यात्रियों व लंगर संचालकों ने सरकार से यात्रा मार्ग पर सरकारी बसों को अधिक से अधिक चलवाने की मांग की है। ओमप्रकाश निगम के अनुसार सरकारी बस का किराया वहां सरकार ने 550 रुपये तय किया है। बलवे से पहले सरकारी बसें कई चल रही थीं, लेकिन बलवे के बाद से वह गायब हैं। अब टैक्सी वालों का राज है। ऐसे में वह कई गुना अधिक किराया वसूल रहे हैं।