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अखिलेश यादव तो नाईक से 'महका रहे हैं' रिश्ते

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क्या यूपी के सीएम अखिलेश यादव यूपी में नरेंद्र मोदी के नुमाइंदे राज्यपाल राम नाईक से अपने रिश्ते महका रहे हैं? तस्वीरें तो यही कहती हैं।
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अख‌िलेश यादव तो नाईक से 'महका रहे हैं' र‌िश्ते

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राजभवन में हुए एक कार्यक्रम में यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने कैमरे के सामने ही राज्यपाल राम नाईक के हाथों में इत्र लगाया। वह राज्यपाल के लिए यह इत्र खासतौर पर फ्रांस से लेकर आए थे।
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पहली बारिश के बाद मिट्टी से उठने वाली सुंगध जैसे खुशबू वाले इत्र के माध्यम से क्या सीएम अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिशें कर रहे थे।

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राज्यपाल राम नाईक से अखिलेश यादव का टकराव कभी से नहीं रहा है। मसला कितना भी बिगड़ा हो लेकिन राज्यपाल और मुख्यमंत्री दोनों ही राजभवन या मुख्यमंत्री पर सीधे कटाक्ष करने से बचते रहे हैं।
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पिछले कुछ समय से आजम खां के अलावा कुछ और मसलों पर भी राज्यपाल और प्रदेश सरकार के बीच तनातनी की नौबत रही है। आजम खां के साथ राज्यपाल के संबंध तो इस कदर खराब थे कि राम नाईक ने इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक से शिकायत की।
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इस घटना के बाद राजभवन और मुख्यमंत्री आवास के बीच एक अलि‌खित और अव्याख्यित तल्‍खी ने घर कर लिया था। हमले फिर नहीं हुए। इसे कथित तल्‍खी को कम करने के लिए एक दिन अचानक मुलायम सिंह यादव भी राज्यपाल से मिलने पहुंचे।
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उनके मिलने को लेकर कई तरह के कयास लगे। एमएलसी उम्मीदवार तय करने से लेकर यूपी की कैबिनेट के विस्तार तक की चर्चाएं हुईं। मुलायम सिंह निकले तो उन्होंने बताया कि राम नाईक दरअसल उनके पुराने मित्र हैं।

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शाहजहापुर पत्रकार हत्याकांड, उसमें अखिलेश सरकार के एक मंत्री की कथित भूमिका के बाद राज्यपाल के तेवर फिर से तल्‍ख हुए थे। राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को कानून व्यवस्‍था पर राजधर्म निभाने की नसीहत दी थी।
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इत्र लगाने वाली इस मुलाकात को इसी रूप से देखा जा रहा है। हालांकि राजनीति टीकाकारों का यह भी मानना है कि अखिलेश यादव दरअसल एमएलसी उम्मीदवारों के नाम राजभवन से पास कराने के लिए यह दोस्ताना मुद्रा अपने रहे हैं। कयास यह हैं कि राजभवन कुछ उम्मीदवारों के नाम लटका सकता है।
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