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पिता ओवरटाइम ऑटो चलाकर जरूरतें करते थे पूरी, बेटे ने यूपी टॉप कर रोशन कर दिया नाम, तस्वीरें

Mon, 30 Apr 2018 11:43 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाराबंकी
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यूपी बोर्ड - फोटो : amar ujala
यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट की परीक्षा में प्रदेश में टॉप करने वाले आकाश मौर्या लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए हैं। अभावों के बीच आकाश ने कड़ी मेहनत से अपने पिता और परिवार का नाम रोशन कर दिया है। पांच सौ में 466 अंक प्राप्त कर प्रदेश के टॉपर बने आकाश मौर्या के पिता ऑटो चलाते हैं। कांशीराम कॉलोनी में रहकर आकाश ने जो ऊंचाई हासिल की है, उससे उनका परिवार खुशी से फूला नहीं समां रहा है।

आकाश ने साबित कर दिया कि बड़े से बड़ा मुकाम हासिल करने के लिए संसाधनों की नहीं कड़ी मेहनत जरूरी होती है। उनकी सफलता का यही राज है। वह अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता व गुरुजनों को देते हैं। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उनका सक्सेज मंत्रा दिन रात की मेहनत रही है। आकाश इंजीनियर बनना चाहते हैं।

आकाश स्कूल में क्लास करने के बाद एक घंटे की एक्स्ट्रा क्लास और फिर घर पर छह से सात घंटे की पढ़ाई हर रोज करते थे। उनके पिता कुलदीप मौर्य बेटे की सफलता पर गदगद हैं। खुशी के आंसू के बीच पिता कुलदीप बताते हैं कि वो प्राइवेट गाड़ी चलाते हैं। पुत्र की पढ़ाई में जब बाधा आई तो ड्यूटी के बाद एक और ऑटो चलाकर ओवरटाइम करते थे। मां फूलकेसरी बताती हैं कि स्कूल का कड़ा अनुशासन और सभी के सहयोग के चलते कभी रुकावट नहीं आई।
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अपने परिवार के साथ आकाश मौर्या।
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- फोटो : amar ujala
आकाश को अमर उजाला परिवार की तरफ से भी बहुत-बहुत बधाई।

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आकाश मौर्या जब अपने कॉलेज पहुंचे तो उनके स्कूल के प्रधानाचार्य ने उन्हें खुशी से गोद में उठा लिया।
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यूपी बोर्ड - फोटो : amar ujala
अपने परिवार के साथ आकाश मौर्या।
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लक्ष्य से भटक न जाएं इसलिए नहीं मिला मोबाइल
प्रदेश के तीसरे टॉपर अजीत पटेल भी बाराबंकी से आते हैं। वो एक साधारण किसान के बेटे हैं। अजीत का कहना है कि वो सिविल सेवा में जाकर समाज के दबे-कुचले वर्ग और किसानों के लिए कुछ करना चाहते हैं। अजीत का मानना है कि भाग्य के सहारे रहकर बुलंदियों को नहीं छुआ जा सकता है। खुद की मेहनत के बिना कोई मुकाम हासिल नहीं होता। बेटे की सफलता से उत्साहित रामेश्वर शरण बताते हैं कि उन्होंने बेटे की हर सुख सुविधा का ध्यान रखा लेकिन उसका ध्यान पढ़ाई से भटक न जाए इसके लिए कभी मोबाइल नहीं दिया।
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अपने परिवार के साथ अजीत पटेल।
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आकाश और अजीत ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और गुरुजनों को दिया।
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