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Tikauli Live: भयावह हादसे से आंसुओं के सैलाब में डूबा टिकौली, हर तरफ पसरा मातम, दुर्घटना में हुई थी 10 की मौत

Wed, 28 Sep 2022 01:26 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
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- फोटो : amar ujala
सुखलाल के सामने पत्नी का शव ठेले पर रखा था। बेटे इससे लिपटकर रो रहे थे। पॉलिथीन में मां की लाश देखते ही बेटी बेहोश हो गई। कच्ची मड़ैया में मौजूद महिलाएं भी आंसू नहीं रोक पा रही थीं। ऐसा ही हृदय विदारक विलाप सुखलाल के घर के ठीक सामने भी हो रहा था। सीतापुर के अटरिया के टिकौली गांव में मंगलवार को यही नजारा देखने को मिल रहा था।

टिकौली गांव सीतापुर हाईवे से तीन किमी. अंदर है। यहां करीब 250 परिवार रहते हैं। सोमवार को इटौंजा के गद्दीपुरवा गांव में ट्रैक्टर ट्रॉली के तालाब में डूबने से हुए हादसे में गांव के दस लोगों की मौत हो गई। किसी ने बेटी खोई तो किसी का मां का आंचल छूट गया। किसी की पत्नी तो किसी की बहन चल बसी। हादसे के बाद गांव आंसुओं के सैलाब में डूबा दिखा। हर ओर मातम पसरा था। अर्थियों के आगे महिलाएं बिलखते व पुरुष सुबकते नजर आए। मंगलवार को ‘अमर उजाला’ की टीम टिकौली गांव पहुंची। पेश है रिपोर्ट:

सूख गए सुखलाल के आंसू
- मृतक सुखरानी 
गांव में प्रवेश करते ही बाईं ओर तालाब के आगे सुखलाल मौर्य का कच्ची मिट्टी का बना घर है। खेती करने वाले सुखलाल की पत्नी सुखरानी का शव पॉलिथीन में लिपटा ठेले पर रखा था। बेटे ब्रजेश व अभिषेक इससे लिपटकर रो रहे थे तो बाहर कुर्सी पर बैठे सुखलाल के आंसू सूख चुके थे। वह सुधबुध खो चुके थे। इसी बीच ससुराल से पहुंची बेटी सुषमा मां का शव देख दहाड़ मारकर रोने लगी। वह पिता से चिपट गई, लेकिन सुखलाल इतने सदमे में थे कि उनके मुंह से बोल तक नहीं फूट रहे थे।
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- फोटो : amar ujala
मां को जाने से रोका था...
-मृतक अन्नपूर्णा देवी
सुखलाल के घर से बाईं ओर पतली गली से होकर जाने पर अगला मकान बाबूराम अवस्थी का है। उनका व सुखलाल का घर सटा है। बाबूराम की पत्नी अन्नपूर्णा देवी हादसे का शिकार हो गईं। मां व बहन फूट-फूटकर रो रही थीं। दो बेटे आशीष व मनीष हैं। पहला बीएससी कर रहा है, दूसरा इंटर में है। ग्रामीणों ने बताया कि बेटों ने मां को जाने से रोका था, लेकिन वह नहीं मानी और फिर हमेशा के लिए चली गई। 
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- फोटो : amar ujala
पड़ोसी के घर नहीं जला चूल्हा
-मृतक मालती देवी
बाबूराम के घर से पतली गली में बढ़ने पर दाहिनी तरफ राजकिशोर का मकान है। उनकी पत्नी मालती देवी का शव बर्फ की सिल्ली पर रखा था। बेटे शैलेंद्र, राजेंद्र तथा बेटी विनीता मां से लिपटकर रो रहे थे। राजकिशोर के घर गमी होने के कारण पड़ोस में रहने वाले मुस्लिम परिवार के घर भी चूल्हा नहीं जला।

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- फोटो : amar ujala
पत्नी के साथ बेटी को भी खो दिया
-मृतका कोमल व आयुषि
राजकिशोर के घर से 50 मीटर आगे गांव के सबसे रईस जोतकार चुन्नीलाल मौर्य का मकान है। हादसे में उनकी पत्नी कोमल व बेटी आयुषि की जान चली गई। प्रधान अखिलेश कुमार ने बताया कि चुन्नीलाल छह भाई और दो बहनें हैं। पिता बद्री प्रसाद गांव के सबसे बड़े जोतकार थे। रसूखदार होने के बावजूद उनके घरवालों की गांववालों से आत्मीयता थी। चुन्नीलाल के परिवार में बेटा अर्पित व आशुतोष बचे हैं।
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- फोटो : amar ujala
रात में ही कर दिया बेटी को दफन
- मृतका अंशिका
चुन्नीलाल के मकान से बाईं ओर मुड़ने पर रास्ता गांव के अंदर जाता है। दो सौ मीटर खड़ंजा पार करने पर पवन गुप्ता का घर है। उनकी बेटी अंशिका की हादसे में जान चली गई, जिसे उन्होंने बीती रात ही दफन कर दिया था। चौखट पर बैठीं महिलाओं की डबडबाई आंखें दर्द बयां कर रही थी। पवन गुप्ता भी कुछ बोलने की स्थिति में नहीं थे।
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टिकौली - फोटो : amar ujala
खेत में ही कर दिया अंतिम संस्कार
- मृतक सुनीला के परिजन
पवन के घर से आगे बढ़ने पर इंटरलॉकिंग वाली सड़क मिलती है। फिर रामखिलावन का घर है, उनकी पत्नी सुनीला की दुर्घटना में मौत हुई है। घर से दो किमी दूर खेत में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। सुनीला के परिवार में बच्चे विजय बहादुर, पारुल व पप्ली हैं। राम खिलावन पैरों से दिव्यांग हैं।
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- फोटो : amar ujala
सगी बहनों जैसी थीं देवरानी-जेठानी
-मृतक सुषमा व उनकी बेटी रुचि मौर्या
रामखिलावन की पत्नी का अंतिम संस्कार देखने के बाद कीचड़ वाले सड़क से गांव की ओर लौटे तो पहली पक्की मिली सड़क हाईवे से आने वाली सड़क से मिल जाती है। यहीं पर रामरतन का घर है। वह और चुन्नीलाल भाई-भाई हैं। हादसे में रामरतन की पत्नी सुषमा व बेटी रुचि मौर्या की जान चली गई। सुषमा व चुन्नीलाल की बीवी कोमल में रिश्ता तो देवरानी-जेठानी का था, लेकिन रिश्ते सगी बहनों जैसे थे। रामरतन का एक बेटा प्रदीप मौर्या पुलिस में, दूसरा दिलीप मौर्या बिजनेस करता है। 
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- फोटो : amar ujala
...ताकि हमेशा आंखों के सामने रहे मां
-मृतक केतकी का परिवार
छोटेलाल मौर्य रामरतन के पड़ोसी हैं। उनकी पत्नी केतकी ने भी हादसे में दम तोड़ दिया। बेटों रामलखन, विश्वनाथ, हरिश्चंद्र व रिंकू ने मां की अंत्येष्टि घर के सामने खेत में ही कर दी, ताकि वह हमेशा आंखों के सामने ही रहे। बताया कि मां सोमवार को व्रत भी थी। 
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