लखनऊ के शिरोज हैंगआउट में चल रहे पांचवें लिटरेरी फेस्टिवल का माहौल शुक्रवार शाम राजनैतिक हो गया। आज से शुरू हुए लिटरेरी फेस्टिवल में अपनी किताब 'बिहार से तिहाड़' पर चर्चा के लिए लखनऊ के शिरोज हैंगआउट पहुंचे कन्हैया कुमार पर एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया।
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कन्हैया कुमार
कन्हैया कुमार जैसे ही मंच पर बोलने पहुंचे एबीवीपी के कार्यकर्ता मंच पर पहुंच गए और 'कन्हैया कुमार वापस जाओ' के नारे लगाते हुए हंगामा करने लगे। कुछ कार्यकताओं ने कन्हैया कुमार पर हमला करने का प्रयास भी किया।
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कन्हैया कुमार
एबीवीपी समर्थकों के इस हंगामें से लिटरेरी फेस्टिवल पूरी तरह से बाधित हो गया। इस कार्यक्रम को आयोजित कर रहीं शिरोज हैंगआउट की एसिड अटैक पीड़ितों ने लगातार एबीवीपी कार्यकर्ताओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने किसी की एक ना सुनी।
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कन्हैया कुमार
घटना की सूचना पर करीब एक घंटे बाद पहुंची पुलिस ने विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं को वहां से बाहर निकाला। इस दौरान करीब एक घंटे तक कार्यक्रम स्थगित रहा। बाद में मंच पर बोलने आए कन्हैया कुमार ने कहा कि यह पहला मौका है जब किसी लिटरेरी फेस्टिवल में मेरा राजनैतिक विरोध हो रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अलग विचार धारा होने के बावजूद भी एक मंच से दोनों को बोलने की आजदी है। यही लोकतंत्र की खूबी है।
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कन्हैया कुमार
यह जनता को तय करने का अधिकार है कि वह किसे सही समझती है और किसे गलत। इस परंपरा को जिंदा रखने की जरूरत है। एबीवीपी कार्यकर्ताओं के इस विरोध पर उन्होंने कहा कि लखनऊ तहजीब का शहर है, और लखनऊ की यह तहजीब तो नहीं है।
लखनऊ के शिरोज हैंगआउट में 10 से 12 नवंबर तक लिटरेरी फिस्विल का आयोजन किया जाना था, लेकिन आज हुए विरोध प्रदर्शन के बाद कार्यक्रम निरस्त कर दिया गया है।