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आज का योग: डायबिटीज और हृदय रोगियों को जरूर करने चाहिए ये तीन योगासन, कंट्रोल में रहेगी बीमारी

Mon, 21 Mar 2022 12:25 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सेहत का रखें ख्याल - फोटो : iStock
जीवनशैली और आहार से संबंधित गड़बड़ी के कारण हाल के वर्षों में कई तरह की बीमारियों का खतरा काफी बढ़ गया है। डायबिटीज और हृदय रोग ऐसी ही समस्याएं हैं, जिनसे पूरी दुनिया परेशान है। हृदय रोगों को दुनियाभर में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है, वहीं डायबिटीज साइलेंट किलर डिजीज है जो शरीर में कई अन्य बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकती है। यही कारण है कि इन दोनों बीमारियों से बचाव के लिए सभी लोगों को नियमित प्रयास करते रहने की सलाह दी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक डायबिटीज और हृदय रोगों से सुरक्षित रहने के लिए स्वस्थ आहार के साथ शारीरिक गतिविधि आवश्यक है। इसके लिए दिनचर्या में योगसनों को शामिल करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।

नियमित रूप से योग का अभ्यास करने से आपके रक्तचाप को कम रखने, ग्लूकोज के स्तर में सुधार करने, इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाने और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने में मदद मिल सकती है। योग हृदय रोग और मधुमेह  के जोखिम को कम करने में मदद करते हैं। यह तंत्रिका तंत्र को शांत करता है और रोग पैदा करने वाले इंफ्लामेशन को भी कम करने में सहायक है। आइए आगे की स्लाइडों में जानते हैं कि मधुमेह और हृदय रोगियों के लिए कौन से योगासन काफी फायदेमंद हो सकते हैं?
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डायबिटीज में पश्चिमोत्तानासन योग - फोटो : Pixabay
पश्चिमोत्तानासन योग का करें अभ्यास
पश्चिमोत्तानासन योग शरीर के लिए कई तरह से विशेष लाभदायक हो सकता है। यह रक्तचाप को कम करने और वजन घटाने में मदद करता है जिससे  रक्तचाप और ब्लड शुगर दोनों के स्तर को नियंत्रित बनाए रखने में मदद मिल सकती है। पश्चिमोत्तानासन योग का नियमित अभ्यास चिंता, सिरदर्द और थकान को दूर करने में भी आपके लिए मददगार माना जाता है। शरीर में रक्त के संचार को बढ़ाने के साथ अंगों को स्वस्थ बनाए रखने में इस योग के लाभ हो सकते हैं।
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सर्वांगासन योग के स्वास्थ्य लाभ - फोटो : pixabay
सर्वांगासन योग
सर्वांगासन योग संपूर्ण शरीर को स्वस्थ और फिट बनाए रखने में कारगर माना जाता है। यह योग मुद्रा आपके सिर की ओर रक्त परिसंचरण को बढ़ावा देती है, जिससे त्वचा की बनावट और गुणवत्ता में सुधार होता है। ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित बनाए रखने और हृदय रोग के कारकों को कम करने में भी इस योग के नियमित अभ्यास से आपको लाभ मिलता है। यह आपकी त्वचा को पिंपल्स, मुंहासों, झुर्रियों से छुटकारा दिलाने में भी मदद करता है।
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अनुलोम-विलोम का अभ्यास - फोटो : istock
अनुलोम विलोम का अभ्यास
चिंता, तनाव या भावनाओं को नियंत्रित करने के लिए सांस का यह अभ्यास आपके लिए विशेष लाभदायक हो सकता है। हृदय रोग और डायबिटीज के तमाम कारकों को कम करने और रक्तचाप-रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखने में इस योग के नियमित अभ्यास से लाभ मिलता है। योग विशेषज्ञों के मुताबिक अनुलोम विलोम का अभ्यास शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत को बेहतर बनाए रखने में सहायक माना जाता है। 


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नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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