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Yoga Tips: ऑटोइम्यून डिसऑर्डर में भी योगासनों से मिल सकता है लाभ, रुमेटीइड आर्थराइटिस में ये आसन हैं कारगर

Fri, 19 Aug 2022 01:40 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नियमिच योगासनों के अभ्यास की बनाएं आदत - फोटो : Istock
योग संपूर्ण स्वास्थ्य यानि कि शरीर और मन दोनों को स्वस्थ और फिट बनाए रखने का सबसे बेजोड़ तरीका माना जाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि कई प्रकार की मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की समस्याओं में नियमित रूप से योगासनों का अभ्यास करना आपको लाभ दिला सकता है। कुछ शोध बताते हैं कि जिन लोगों को ऑटोइम्यून डिसऑर्डर होता है वह भी योगाभ्यास से विशेष लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

ऑटोइम्यून डिसऑर्डर, ऐसी समस्याएं होती हैं जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली स्वयं अपनी ही स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला कर देती है। बालों में पैच पड़ने यानी एलोपीसिया और रूमेटाइड आर्थराइटिस ऑटोइम्यून डिसऑर्डर के उदाहरण हैं।

अध्ययनों से पता चला है कि योग शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्तर पर कई प्रकार के ऑटोइम्यून विकारों को प्रबंधित करने में मदद कर सकता है। योग वास्तव में एक जीवनशैली है और इसके रोजाना अभ्यास की आदत आपकी सेहत को कई प्रकार से लाभ दे सकती है। आइए जानते हैं कि इस तरह की समस्याओं से परेशान लोगों को किन आसनों के अभ्यास से लाभ मिल सकता है?
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आर्थराइटिस में कौन से योग करें - फोटो : iStock
ऑटो-इम्यून विकारों में योग के लाभ

योग विशेषज्ञ कहते हैं, तनाव को कम करने के अलावा, योग ऑटो-इम्यून डिसऑर्डर के प्रबंधन में भी कई तरीकों से मदद कर सकता है, खासकर सूजन के कारण होने वाली दर्द की समस्या में इसके अभ्यास से लाभ पाया जा सकता है। शोध में रुमेटीइड आर्थराइटिस वाले लोगों में योगासनों के अभ्यास से काफी लाभ देखा गया है।

विशेषज्ञों ने पाया कि योग शरीर की गति  मुद्रा, समन्वय और मांसपेशियों की ताकत में सुधार करके आर्थराइटिस वाले लोगों में सूजन और दर्द जैसी समस्याओं को ठीक करने में योगासन काफी लाभकारी हो सकते हैं। इसके लिए किसी योग प्रशिक्षक से मिलकर योगासनों के बारे में सही जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। विशेषज्ञ इन दो आसनों को ऐसे रोगियों के लिए काफी फायदेमंद मानते हैं।
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ब्रिज पोज योग करने से लाभ - फोटो : istock
सेतुबंधासन योग से लाभ

रुमेटीइड आर्थराइटिस की समस्या से परेशान लोगों के लिए सेतुबंधासन योग के अभ्यास को काफी फायदेमंद माना गया है। यह योग जांघों को फैलाने और छाती को खोलने के साथ कोर, कूल्हों और जांघों में रक्त का प्रवाह बढ़ता है। उंगलियों के जोड़ों, कलाई और कंधों को मजबूत करने के साथ घुटनों को मजबूत बनाने में भी इसके लाभ पाए गए हैं। जिन लोगों को पीठ दर्द, तनाव और चिंता की समस्या बनी रहती है, ऐसे लोगों को भी सेतुबंधासन योग से लाभ मिल सकता है।

हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ आर्थराइटिस वाले लोगों को किसी विशेषज्ञ की निगरानी में ही इसके अभ्यास करने की सलाह देते हैं।
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पश्चिमोत्तानासन योग से होने वाले लाभ - फोटो : Pixabay
पश्चिमोत्तानासन योग से लाभ

पश्चिमोत्तानासन योग का अभ्यास घुटनों की समस्याओं के शिकार लोगों को काफी लाभ दे सकता है, विशेषकर जिन लोगों को रुमेटीइड आर्थराइटिस की समस्या है उन्हें इसके अभ्यास से विशेष लाभ प्राप्त हो सकता है।  हैमस्ट्रिंग की स्ट्रेचिंग के साथ घुटने में रक्त प्रवाह को बढ़ाने में इस योग की आदत से लाभ पाया जा सकता है। यह योग गर्दन और कंधों को मजबूत बनाने के साथ आपकी जीवन शक्ति को बढ़ाने और प्रजनन स्वास्थ्य को भी लाभ दे सकता है। 


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नोट:
यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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