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Yoga Tips: अस्थमा रोगियों के लिए वरदान हैं ये योगासन, सांसों की समस्या होती है दूर

Sat, 25 Feb 2023 02:39 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अस्थमा मरीजों के लिए योग - फोटो : istock
Yoga Benefits For Asthma Patients: होली का त्योहार आने वाला है। होली के मौके पर रंग लगाकर होली खेली जाती है। कई लोगों को रंग से सांस की समस्या हो सकती है। वहीं जिन लोगों को अस्थमा की शिकायत है, होली खेलने से उनकी परेशानी बढ़ सकती है। इसके अलावा प्रदूषण के कारण भी सांस की शिकायत या अस्थमा में दिक्कत हो सकती है। अस्थमा, श्वसन संबंधित एक गंभीर और क्रोनिक बीमारी है। जिन लोगों को अस्थमा होता है, उन्हें सांस फूलने, सांस लेने में तकलीफ और दम घुटने की समस्या हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि अस्थमा को ठीक नहीं कि जा सकता है, लेकिन कई उपायों को अपनाकर लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। योगासनों का नियमित अभ्यास कई तरह की गंभीर बीमारियों के लक्षण को कम कर सकता है और मानसिक सेहत को मजबूती देता है। कुछ योग अस्थमा मरीजों की समस्या को कम करते हैं। अगली स्लाइड्स में जानिए अस्थमा मरीजों के लिए फायदेमंद योगासनों के बारे में।
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योग कई तरह से शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। - फोटो : istock
सुखासन

अस्थमा मरीजों के लिए सुखासन एक आसान आसन है। इस आसन का अभ्यास सुबह करना बहुत फायदेमंद होता है। सुखासन करने के लिए पेट खाली होना जरूरी नहीं होता है। जब तक आप आराम से बैठ सकते हैं, तब तक इस योग को किया जा सकता है। सुखासन करते समय सांसों पर ध्यान केंद्रित करना होता है, जो स्ट्रेस को काबू में करता है और दिमाग को आराम दिलाता है। इस आसन के अभ्यास से शांति और एकाग्रता का अहसास होता है।
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सेतु बंधासन - फोटो : istock
सेतु बंधासन

सेतु बंधासन में शरीर को एक पुल का आकार दिया जाता है। इस आसन को सुबह खाली पेट किया जाना चाहिए। इसका अभ्यास 30 से 60 सेकंड तक कर सकते हैं। अस्थमा के मरीजों के लिए सेतुबंधासन फायदेमंद योगासन है। इस आसन को करने से सीने और फेफड़े खुलते हैं और शरीर बैलेंस बना रहता है। सांस लेने की क्षमता में सुधार करने में इस योग को काफी लाभदायक माना जाता है।

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पवनमुक्तासन - फोटो : pixabay
पवनमुक्तासन

अस्थमा के रोगी पवनमुक्तासन का नियमित अभ्यास करके भी श्वसन संबंधित समस्या से राहत पा सकते हैं। पवनमुक्तासन में पीठ के बल लेटकर दाहिने पैर के घुटने को मोड़ते हुए छाती पर लगाया जाता है और दोनों हाथों की उंगलियों को मिलाते हुए घुटने से थोड़ा नीचे होल्ड करते हैं। पैरों से छाती पर दबाव पड़ने पर धीरे-धीरे सांस को अंदर बाहर छोड़ा जाता है।
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योग के नियमित अभ्यास की बनाएं आदत - फोटो : Pixabay

नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

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