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Yoga Tips: अध्ययन में दावा- ब्रेस्ट कैंसर में योगासनों से मिल सकता है विशेष लाभ, जानिए कौन से अभ्यास हैं कारगर

Fri, 16 Dec 2022 11:21 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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स्तन कैंसर के जोखिम को कैसे कम करें? - फोटो : istock
स्तन कैंसर का खतरा वैश्विक स्तर पर काफी तेजी से बढ़ता देखा गया है। इसे महिलाओं में कैंसर से होने वाली मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण माना जाता है। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि समय के साथ भारतीय महिलाओं में भी इस कैंसर का जोखिम काफी बढ़ गया है। वैश्विक स्तर पर इस कैंसर के कारण हर साल लाखों रोगियों की मौत हो जाती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लोगों में जागरूकता की कमी और अपनी समस्याओं के बारे में खुल कर बात न कर पाने के कारण ज्यादातर रोगियों में इस कैंसर का निदान आखिरी चरणों में हो पाता है। इसके जोखिम कारकों और बचाव के उपाय के बारे में जानना सभी के लिए आवश्यक है।

ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के लिए वजन को कंट्रोल करना, शराब से दूरी बनाना और शारीरिक सक्रियता पर ध्यान देना काफी आवश्यक माना जाता है। इस बीच एक हालिया अध्ययन में विशेषज्ञों ने पाया कि योग को दिनचर्या का हिस्सा बनाकर न सिर्फ स्तन कैंसर से बचाव किया जा सकता है साथ ही योगासन इसके इलाज में भी काफी लाभकारी हो सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी को नियमित रूप से योग के अभ्यास की सलाह देते हैं।
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योग के अभ्यास से लाभ - फोटो : Pixabay
योगासनों के दिखे अच्छे परिणाम

टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के विशेषज्ञों द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया है कि स्तन कैंसर के रोगियों के उपचार में योग को शामिल करना बेहद फायदेमंद हो सकता है। यह रोग की जटिलताओं को कम करने और जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने में लाभकारी हो सकता है। डॉक्टर्स और फिजियोथेरेपिस्ट की निगरानी में स्तन कैंसर रोगियों को कराए गए योगाभ्यास-प्राणायाम के बेहतर लाभ देखे गए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, स्तन कैंसर में योग के लाभ को लेकर किए गए नैदानिक परीक्षण के परिणाम महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकते हैं।

आइए जानते हैं कि किन योगासनों को योग विशेषज्ञ इस समस्या में लाभकारी मानते हैं?
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योगासनों से होने वाले लाभ - फोटो : Pixabay
प्राणायाम के अभ्यास से लाभ

शोधकर्ताओं ने पाया कि ब्रेस्ट कैंसर की समस्या में प्राणायाम के अभ्यास की आदत बनाने से लाभ मिल सकता है। रेडिएशन थेरेपी ले रहे स्तन कैंसर रोगियों के लिए प्राणायाम को एक सहायक चिकित्सा के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने के अलावा मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए प्राणायाम के अभ्यास से लाभ पाया जा सकता है। यह अभ्यास कैंसर को जोखिमों को कम करने में भी फायदेमंद है।
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बालासन योग से ब्रेस्ट कैंसर में लाभ - फोटो : istock
बालासन से फायदे

बालासन जिसे चाइल्ड पोज के रूप में भी जाना जाता है, यह मुद्रा छाती की मांसपेशियों और कूल्हों, जांघों और पीठ को आराम देती है। स्तन कैंसर के रोगियों के लिए भी इससे लाभ हो सकते हैं। यह मस्तिष्क को शांत करता है और थकान-तनाव से राहत देता है। कमर-पीठ और पेट के लिए इस योग के नियमित अभ्यास की आदत बनाना आपके लिए विशेष फायदेमंद हो सकता है। 



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नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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