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Yoga Tips: World Spine Day पर जानिए रीढ़ को मजबूती देने वाले सबसे कारगर योगासन, जरूर करें इनका अभ्यास

Sun, 16 Oct 2022 12:30 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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रीढ़ की समस्याओं को कैसे ठीक करें? - फोटो : iStock
लाइफस्टाइल की गड़बड़ी के कारण रीढ़ की हड्डी से संबंधित विकारों का जोखिम काफी बढ़ता जा रहा है। वयस्कों में सर्वाइकल के साथ पीठ के निचले हिस्से में दर्द की समस्या के लिए रीढ़ से संबंधित विकारों को एक कारण माना जाता रहा है। विशेषज्ञ कहते हैं, लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने की आदत ने शरीर के इस सबसे महत्वपूर्ण हड्डी के लचीलेपन और मजबूती को काफी प्रभावित कर दिया है जिसके कारण दर्द और शारीरिक लचीलेपन से संबंधित विकार बढ़ते जा रहे हैं।

रीढ़ की बढ़ती समस्याओं के जोखिम और इससे बचाव के उपायों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 16 अक्तूबर को वर्ल्ड स्पाइन डे मनाया जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, दिनचर्या में योगासनों को शामिल करके रीढ़ से संबंधित विकारों को कम करने में मदद मिल सकती है। कई प्रकार के योगासन न सिर्फ रीढ़ के लचीलेपन को बढ़ाने में मदद करते हैं साथ ही दर्द को कम करने में भी आपके लिए सहायक हैं। अगर कम उम्र से ही नियमित योगासनों की आदत बना ली जाए तो रीढ़ को स्वस्थ रखने के साथ कई प्रकार की शारीरिक स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। आइए जानते हैं कि नियमित रूप से किन योगासनों के अभ्यास को  रीढ़ को मजबूती और लचीलेपन को बढ़ावा देने वाला माना जाता है? 
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रीढ़ के लिए योगासन - फोटो : istock
मार्जरी आसन से रीढ़ को लाभ

रीढ़ की समस्याओं से बचाव के लिए मार्जरी आसन जिसे कैट-काऊ पोज के रूप में भी जाना जाता है, इससे लाभ मिल सकता है। यह आपके पीठ के निचले हिस्से से लेकर गर्दन तक की बेहतर स्ट्रेचिंग के साथ रीढ़ की सेहत के लिए विशेष लाभकारी हो सकती है। रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन और रीढ़ के विस्तार (आर्किंग) के लिए इसके लाभ देखे गए हैं। मार्जरी आसन योग करने से पीठ और पाचन से संबंधित समस्याओं का जोखिम भी कम होता है और यह कई प्रकार के विकारों के जोखिम को कम कर सकती है।
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अधोमुख शवासन योग से रीढ़ को लाभ - फोटो : Pixabay
अधोमुख शवासन योग

अधोमुख शवासन योग के नियमित अभ्यास की आदत बनाकर आप शारीरिक तौर पर सक्रीय रहने के साथ रीढ़ से संबंधित विकारों के जोखिम को कम कर सकते हैं। हैमस्ट्रिंग और काल्फ की स्ट्रेचिंग के साथ रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन को बढ़ाने में अधोमुख शवासन योग को विशेष लाभकारी माना जाता है। इस योग को विशेषज्ञ शरीर को ऊपरी हिस्से में रक्त के संचार को बढ़ाने वाले अभ्यास के तौर पर जानते हैं। सभी उम्र के लोगों को दिनचर्या में इस योगासन को जरूर शामिल करना चाहिए।
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उष्ट्रासन योग से लाभ - फोटो : Istock
उष्ट्रासन योग का करिए अभ्यास

उष्ट्रासन योग रीढ़ को सीधा और लचीला रखने में आपके लिए विशेष लाभकारी माना जाता है। मांसपेशियों को स्वस्थ रखने, रीढ़ से संबंधित दर्द की समस्या को कम करने और छाती के लिए भी इस योग के अभ्यास के लाभ देखे गए हैं। उष्ट्रासन योग का अभ्यास करने से रक्त के संचार को बेहतर बनाए रखने और मांसपेशियों में अकड़न की समस्या को दूर करने में लाभ मिल सकता है। सभी उम्र के लोगों के लिए इस योगासन को लाभकारी माना जाता है।



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नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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