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आज का योग: कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं ये तीन योगासन, रोजाना अभ्यास से मिलेंगे कई तरह के लाभ

Fri, 04 Feb 2022 12:07 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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योग से कम होगा कैंसर का खतरा - फोटो : Istock
कैंसर सबसे घातक रोगों में से एक है। दुनियाभर में हर साल लाखों लोगों को कैंसर के चलते अपनी जान गंवानी पड़ जाती है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को लगातार कैंसर से बचाव के उपाय करते रहने की सलाह देते हैं। कैंसर के बढ़ते खतरे के बारे में लोगों को अलर्ट करने और इससे बचाव को लेकर जागरूकता फैलाने को लेकर हर साल 4 फरवरी को 'विश्व कैंसर दिवस' मनाया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए बचाव के उपायों में नियमित योगासनों का अभ्यास करना भी बेहतर विकल्प हो सकता है।

योग विशेषज्ञ बताते हैं, कई तरह के योगासनों के नियमित रूप से अभ्यास से कैंसर के जोखिम को कम किया जा सकता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि रोजाना अगर 30 मिनट तक योग और शारीरिक अभ्यास जैसे वॉकिंग, तैराकी या साइकिलिंग किया जाए तो कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है। अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम करने वाले लोगों में अन्य लोगों की तुलना में  कैंसर का खतरा कम होता है। आइए आगे की स्लाइडों में उन योगासनों के बारे में जानते हैं जिनका अभ्यास करके आप भी कैंसर के खतरे से सुरक्षित रह सकते हैं। 
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गोमुखासन योग का अभ्यास है फायदेमंद - फोटो : Pixabay
गोमुखासन योग 
योग विशेषज्ञों के मुताबिक गोमुखासन योग का अभ्यास शरीर के लिए कई तरह से लाभदायक माना जाता है। इस योग के अभ्यास से शरीर में स्थिरता बनने के साथ अंगों की स्ट्रेचिंग हो जाती है। शरीर में रक्त के संचार को बढ़ावा देने के साथ इस योग का नियमित रूप से अभ्यास कोशिकाओं को असामान्य तौर पर बढ़ने से रोकता है जिससे कैंसर का खतरा कम हो सकता है। रोजाना 10-15 मिनट तक इस योग का अभ्यास किया जा सकता है।
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प्राणायाम से होता है शक्ति का संचार - फोटो : Pixabay
प्राणायाम है लाभदायक
योग शास्त्र में प्राणायाम के अभ्यास को शरीर के संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद बताया गया है। उज्जायी प्राणायाम तकनीक मन को शांत करने और शरीर के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में काफी लाभदायक माना जाता है। योग विशेषज्ञ बताते हैं कि कैंसर से पीड़ित रोगियों को रोजाना उज्जयी प्राणायाम करने की  सलाह दी जाती है। यह प्राणायाम कैंसर के लक्षण और गंभीरता कम कम करने में सहायक है।
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भुजंगासन योग कई तरह से है लाभदायक - फोटो : Istock
भुजंगासन योग का अभ्यास
भुजंगासन या कोबरा पोज योग रीढ़, कूल्हे की मांसपेशियों, छाती, पेट, कंधों, फेफड़ों को मजबूत करता है। तनाव को दूर करते हुए रक्त परिसंचरण में सुधार करने में भी इस योग को काफी फायदेमंद माना जाता है। योग विशेषज्ञों के मुताबिक पेट के मांसपेशियों की इस योग से स्ट्रेचिंग हो जाती है जिससे कई तरह के कैंसर का खतरा कम हो जाता है। कैंसर की समस्या में कोबरा पोज फायदेमंद योगासनों में से एक है।


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नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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