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Yoga Tips: दिवाली में अस्थमा को ट्रिगर होने से बचाने के लिए अभी से शुरू कर दें इन योगासनों का अभ्यास

Sun, 12 Nov 2023 08:23 AM IST
शिवानी अवस्थी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिवाली में अस्थमा से बचाव के लिए योग - फोटो : Istock
Yoga Tips For Asthma Patients: दीपावली को उत्साह, जश्र, मिठाइयों और पटाखों का त्यौहार माना जाता है। दिवाली के मौके पर डायबिटीज और अस्थमा के रोगियों को सबसे ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इस त्यौहार में कई तरह के पकवान और मिठाइयां बनती हैं, जिनका सेवन मधुमेह रोगियों की परेशानी को बढ़ा सकता है। वहीं दिवाली के त्योहार को मनाने के लिए लोग पटाखे जलाते हैं, जिसके कारण अस्थमा रोगियों की जटिलता बढ़ने का खतरा रहता है। पटाखों से निकलने वाला धुआं अस्थमा रोगियों की मुश्किलों को बढ़ा देता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि पटाखों में कई तरह के हानिकारक रसायन होते हैं, जिनके जलने पर वातावरण प्रदूषित होता है और अस्थमा समेत श्वास संबंधित रोगियों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में अगर दिवाली के मौके पर पटाखों के कारण अस्थमा मरीजों की जटिलता बढ़ने के खतरे को कम करना है, तो कुछ योगासनों का अभ्यास फायदेमंद हो सकता है। अभी से योगासनों का अभ्यास शुरू कर दें, ताकि अस्थमा की परेशानी को बढ़ने से रोका जा सके।
 
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अस्थमा से बचाव के लिए योगासन - फोटो : istock
अस्थमा को नियंत्रित करने वाले योगासन

कपालभाति प्राणायाम

श्वास संबंधित समस्या से राहत के लिए कपालभाती प्राणायाम असरदार है। इस आसन के अभ्यास से सांस लेने की तकलीफ दूर होती है और मन शांत होता है। तंत्रिका तंत्र सक्रिय होती है। कपालभाति प्राणायाम शरीर की सभी नाड़ियों को साफ करता और रक्त परिसंचरण में सुधार करता है।
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पवनमुक्तासन - फोटो : pixabay
पवनमुक्तासन

अस्थमा के रोगियों के लिए पवनमुक्तासन योग का अभ्यास अच्छा माना जाता है। इस योगासन के नियमित अभ्यास से उदर के अंगों की मालिश होती है और पाचन व गैस के निर्गमन में मदद मिलती है। दिवाली में श्वास से जुड़ी परेशानियों से बचाव के लिए पवनमुक्तासन का अभ्यास करना शुरू कर दें।

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सेतुबंधासन - फोटो : istock
सेतुबंधासन

सेतुबंधासन को ब्रिज पोज कहते हैं। इस आसन को अभ्यास थायराइड की समस्या को कम कर सकता है। छाती और फेफड़ों को खोलता है और पाचन में सुधार लाता हा। अस्थमा रोगियों के लिए सेतुबंधासन बहुत प्रभावी योगाभ्यास है।
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भुजंगासन - फोटो : Istock
भुजंगासन

भुजंगासन का अभ्यास कोबरा मुद्रा में किया जाता है। इस आसन को करने से रक्त परिसंचरण में सुधार होता है। अस्थमा मरीजों के लिए इस आसन का नियमित अभ्यास लाभदायक है। भुजंगासन के नियमित अभ्यास करने से पटाखों से होने वाली सांस संबंधी समस्या से बचाव करेगा।

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नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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