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गैस, कब्ज और एसिडिटी की समस्या से पाना है छुटकारा, तो रोजाना करें इस खास आसन का अभ्यास

Sun, 24 May 2020 08:20 AM IST
नवनीत राठौर लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अनियमित जीवनशैली के कारण गैस बनने से लेकर पेट फूलने और कब्ज होने की समस्या बेहद आम हो गई है। ये एक ऐसी समस्या हो गई है, जिससे कोई भी अछूता नहीं रहा है। इस परेशानी का सबसे मुख्य कारण यह है कि व्यस्तता भरी जिंदगी में लोग इस बात का ध्यान ही नहीं रख पाते कि वे क्या खा रहे हैं और कब खा रहे हैं। भोजन में इस अनियमितता के कारण ही पेट की समस्या हो जाती है। हालांकि, योग एक ऐसा माध्यम है जिससे इस परेशानी से राहत पाई जा सकती है। आज हम आपको पवनमुक्तासन के बारे में बताने जा रहे हैं, जो पेट की समस्या में बहुत लाभदायी होता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
पवनमुक्तासन एक योग क्रिया है। पवन का अर्थ है वायु और मुक्त का अर्थ है छोड़ना या मुक्त करना। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है ये आसन आपकी आंतों से वायु या वात निकालने में उपयोगी है। इस आसन के करने से कभी कब्ज की समस्या नहीं होती और पाचन में सुधार होता है। यह आसन गहरा आंतरिक दबाव डालकर आपके कुल्हे और कमर के हिस्से की मांसपेशियों, लिंगामेंट और स्नायु की जटिल समस्याओं का निदान कर उनमें कसावट लाता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
पवनमुक्तासन करने की विधि
पवनमुक्तासन योग को करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं। सुनिश्चित करें कि आपकी दोनों हथेलियों का मुख आसमान की तरफ हो। ऐसा करने के बाग आप जिस आसन में आते हैं उसे शवासन कहा जाता है। अब अपने दाएं पैर को घुटने से मोड़ते हुए घुटने को दोनों हाथों से पकड़कर छाती की ओर लाएं। इसके बाद सिर को जमीन से ऊपर उठाने की कोशिश करते हुए अपनी नाक से घुटने का स्पर्श करें।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
आप इस स्थिति में जब तक हो सके बने रहे। थोड़ी देर बाद वापस पहले वाली स्थिति में आ जाएं। इसी क्रिया को दूसरे पैर से भी करें। इसके बाद इसे दोनों पैरों से एक साथ करें। पवनमुक्तासन योग दिन में 5 से 10 बार रोजाना करने से पेट की समस्या से पूरी तरह से मुक्ति मिल जाती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
सावधानी
यदि आपको पीठ दर्द हो या कमर में चोट आई हो तो कृपया इस आसन को न करें। इसके अलावा हार्निया और सायटिका के रोगियों को ये आसन नहीं करना चाहिए। महिलाओं को गर्भावस्था में इस आसन को नहीं करना चाहिए।
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