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Mothers Day 2025: मां को सिखाएं ये तीन योगासन, बुढ़ापे में भी रहेंगी अपने बच्चों के बराबर एक्टिव

Sun, 11 May 2025 07:30 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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Yoga for elder womens - फोटो : Adobe
Mothers Day 2025: मदर्स डे 11 मई 2025 को मनाया जा रहा है। इस दिन मां के मातृत्व को सलाम किया जाता है, जिसके लिए बच्चे अपनी मांं को खास महसूस कराते हैं। बच्चों का फर्ज बनता है कि वह अभी अपनी मां की उसी तरह देखभाल या फिक करें जैसे मां करती हैं। इसलिए मदर्स डे पर मां को कोई तोहफा दे या न दें, लेकिन स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित जरूर करें। मां के बेहतर स्वास्थ्य के लिए बच्चे मां को योगासन सिखा सकते हैं। 

नियमित कुछ योगासनों का अभ्यास करने से महिलाओं को कई स्वास्थ्य लाभ हो सकते हैं। 40 की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव आते हैं जैसे हड्डियों का कमजोर होना, मांसपेशियों की ताकत घटना, मेटाबॉलिज्म धीमा होना, मानसिक तनाव बढ़ना और जोड़ों की समस्या आदि। ऐसे में कुछ असरदार योगासन रोजाना करने से न केवल इन समस्याओं से बचा जा सकता है बल्कि बुढ़ापे में भी शरीर और मन चुस्त-दुरुस्त बना रहता है।

इस मदर्स डे अपनी मां को तीन ऐसे प्रभावी योगासन सिखाएं ताकि उम्र बढ़ने पर वह बच्चों पर निर्भर न रहें और बुढ़ापे में भी एक्टिव रहें। उनको हड्डियों का दर्द, पेट की समस्याएं समेत अन्य बढ़ती उम्र वाली बीमारियों से दूर रखने के लिए अभी से नियमित योगासन के लिए प्रोत्साहित करें। यहां तीन सबसे प्रभावी योगासन बताए जा रहे हैं, जिन्हें हर महिला को 40 के बाद अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए।
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भुजंगासन - फोटो : Amar Ujala
भुजंगासन 

भुजंगासन का अभ्यास पीठ की हड्डियों को मजबूत बनाता है। इससे मेरुदंड लचीला बनाता है और स्लिप डिस्क जैसी समस्याओं से बचाव  होता है। भुजंगासन फेफड़ों की क्षमता भी बढ़ाता है। हार्मोन संतुलन के लिए भी यह आसन प्रभावशाली है। इस आसन  को करने के लिए पेट के बल लेट कर हथेलियां कंधे के नीचे रखें। सांस लेते हुए शरीर के ऊपरी भाग को ऊपर उठाएं और नाभि तक शरीर जमीन पर रहे। 15-30 सेकंड तक इस स्थिति में रुके और धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौटें।
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वृक्षासन - फोटो : Adobe
वृक्षासन

महिलाओं के लिए वृक्षासन का अभ्यास फायदेमंद है। इस आसन के अभ्यास से संतुलन और एकाग्रता बढ़ती है। पैरों की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं और शरीर में लचीलापन आता है। घुटने मजबूत होते हैं और हड्डियों की कमजोरी से बचाव होता है। वृक्षासन के अभ्यास के लिए एक पैर पर खड़े होकर दूसरा पैर जांघ पर रखें और दोनों हाथ नमस्कार मुद्रा में जोड़ें।

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सेतुबंधासन - फोटो : Adobe
सेतुबंधासन 

सेतुबंधासन का नियमित अभ्यास पीठ और कूल्हों की ताकत बढ़ाता है। इससे मांसपेशियों में लचीलापन लाता है और मासिक धर्म संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है। इस आसन का नियमित अभ्यास हार्मोन ग्रंथियों को उत्तेजित करता है, थायराइड और ओवरीज़ की कार्यक्षमता को बढ़ाता है और तनाव कम करता है। सेतुबंधासन का अभ्यास करने के लिए पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़े। पैरों को हिप्स के पास रखते हुए धीरे-धीरे कूल्हे को ऊपर उठाएं और हाथों को जमीन पर टिकाकर शरीर का सहारा दें।
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नोट: यह लेख योग गुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।   
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