अगर आपको ये लक्षण नजर आ जाएं तो बिल्कुल भी देर न करें और संभल जाएं। वरना आप बहुत बड़े खतरे में पड़ जाएंगे, जानिए कैसे?
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doctor and Patient
26 वर्षीय एक युवती को अकसर थके रहने और कभी-कभार शरीर में दर्द की शिकायत रहती थी। स्थानीय डाक्टर ने उनकी कई बार जांच की, लेकिन मर्ज पकड़ में नहीं आया। जब वे पीजीआई पहुंचीं तो डॉक्टरों ने उनका विटामिन डी का टेस्ट करवाया। जांच में पता चला कि उनके शरीर में विटामिन डी का स्तर तय मानकों से काफी कम था। ऐसे कई सारे मरीज हैं, जो विटामिन डी कमी से जूझ रहे हैं। दिक्क्त यह है कि ज्यादातर लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं होती। जिस तरह से रोजाना विटामिन, प्रोटीन की डोज जरूरी है, उसी तरह से विटामिन डी की भी डोज जरूरी है।
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Doctor's advice
विटामिन डी की कमी से क्या होता है
हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर होती हैं। शरीर की इम्युनिटी कम होती है, इससे वायरल इंफेक्शन होने के चांस होते हैं। शरीर में हमेशा थकान और दर्द की भी शिकायत रहती है। आंत में सूजन और घाव होने के चांस बढ़ते हैं। कमर और शरीर के निचले हिस्सों में दर्द होना खासकर पिंडलियों में। कुछ मामलों में बालों का झड़ना और पीरियड्स का अनियमित होना देखा गया है। आंत की पाचन क्षमता कमजोर होती है।
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विटामिन डी की कमी को ऐसे पूरा करें
नारियल या तिल का तेल शरीर में लगाकर रोजाना 20 मिनट तक धूप में बैठें। तेल जब शरीर के अंदर जाता है तो उसका कोलेस्ट्राल विटामिन डी में कन्वर्ट होता है। इससे विटामिन डी का स्तर बढ़ता है। विटामिन डी का स्तर बढ़ाने का दूसरा स्रोत डाइट है। शाकाहारी व्यक्ति रोजाना आधा लीटर गाढ़ा वाला दूध लें। दूध पसंद नहीं है तो दही या छाछ भी ले सकते हैं। इसके अलावा हफ्ते में एक बार कम से कम 250 ग्राम पनीर भी खाएं। मांसाहारी खाने वाले व्यक्ति देसी अंडे का सेवन करें। इसके अलावा वे सी-फूड का भी सेवन करें। सी-फूड में सबसे ज्यादा विटामिन डी पाया जाता है।
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क्यों जरूरी होता है विटामिन डी
- कैल्शियम को शरीर के अंदर खींचने का काम करता है।
- इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाए रखता है। इससे वायरल इंफेक्शन नहीं होता।
- आंत की लेयर को मजबूत रखता है, ताकि बाहर के कीटाणु अंदर न जा सकें।
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टेस्ट कराएं
अगर हड्डियों या मसल्स में दर्द रहता है तो 25-हाइड्रॉक्सी विटामिन डी ब्लड टेस्ट कराएं। इसे विटामिन डी डिफिसिएंशी टेस्ट भी कहते हैं। अगर शरीर में दर्द नहीं है तो भी यह टेस्ट करा सकते हैं। अगर लेवल कम निकलता है तो छह महीने या साल भर बाद दोबारा करा सकते हैं। इसकी बाजार में कीमत करीब 1200 रुपये होगी। सरकारी अस्पताल में थोड़ा सस्ता हो सकता है।
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चिकित्सक
कितना विटामिन डी होना चाहिए
किसी भी सेहतमंद शख्स में विटामिन डी का लेवल 50 नैनोग्राम/मिलीग्राम होना चाहिए। हालांकि 20 से 50 नैनोग्राम/मिलीग्राम के बीच नार्मल रेंज है, लेकिन डॉक्टर 50 को ही बेहतर मानते हैं। अगर लेवल 25 से कम है तो डॉक्टर की सलाह लें और विटामिन डी के डोज लें।
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ज्यादा भी खतरनाक होता है
विटामिन डी अगर बहुत ज्यादा हो तो बहुत खतरनाक हो सकता है। ज्यादा तब माना जाता है, जब शरीर में लेवल 800-900 नैनोग्राम/मिली तक पहुंच जाए। ऐसा होने पर किडनी फंक्शन से लेकर मेटाबॉलिज्म तक पर असर पड़ता है। हालांकि विटामिन डी बहुत ही कम मामलों में इस लेवल तक जा पाता है।
आजकल विटामिन डी की कमी के काफी मरीज आ रहे हैं। दरअसल आजकल लोग धूप में कम और इंडोर रहना ज्यादा पसंद करते हैं। इससे विटामिन डी की कमी होती है और कई बीमारियों का खतरा बढ़ता है। यदि दिनभर थकान या शरीर में दर्द रहता तो डाक्टर से विटामिन डी की जांच करवाएं। - उषा दत्ता, प्रोफेसर, गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी पीजीआई