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Gate Pose Benefits: रोज 5 मिनट करें परिघासन, कमर दर्द से लेकर पाचन तक मिल सकते हैं ये फायदे

Mon, 13 Jul 2026 10:21 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

How To Do Parighasana Step By Step: परिघासन कैसे किया जाता है?
परिघासन करने के लिए पहले घुटनों के बल बैठें। अब एक पैर को बगल की ओर सीधा फैलाएं और दूसरे घुटने को जमीन पर रखें। दोनों हाथ फैलाकर सांस लेते हुए ऊपर वाला हाथ सिर के ऊपर ले जाएं और शरीर को फैले हुए पैर की दिशा में झुकाएं। कुछ सेकंड तक इस स्थिति में रहें और फिर दूसरी तरफ यही प्रक्रिया दोहराएं।
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परिघासन कैसे करें - फोटो : AI

 

Parighasana Karne ka Sahi Tarika: परिघासन को अंग्रेजी में गेट पोज कहा जाता है, एक ऐसा योगासन है जो शरीर के दोनों किनारों (Side Body) को गहराई से स्ट्रेच करने के लिए जाना जाता है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लंबे समय तक कुर्सी पर बैठने, गलत पोस्चर और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण कमर, कंधों और रीढ़ में अकड़न की समस्या आम हो गई है। ऐसे में परिघासन शरीर को लचीला बनाने और मांसपेशियों के तनाव को कम करने में मददगार माना जाता है।

यह आसन केवल शरीर की लचक बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सांस लेने की क्षमता में सुधार, रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने और पाचन तंत्र को सक्रिय रखने में भी सहायक माना जाता है। नियमित अभ्यास से शरीर का संतुलन बेहतर हो सकता है और पूरे शरीर में ऊर्जा का संचार महसूस होता है।

हालांकि, किसी भी योगासन की तरह परिघासन को भी सही तकनीक और सावधानी के साथ करना जरूरी है। गलत तरीके से अभ्यास करने पर मांसपेशियों में खिंचाव या दर्द की समस्या हो सकती है। इस लेख में आप जानेंगे कि परिघासन क्या है, इसे करने का सही तरीका, इसके प्रमुख फायदे, किन लोगों को इससे बचना चाहिए और अभ्यास के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

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परिघासन कैसे करें - फोटो : AI

परिघासन क्या है?
 

  • परिघासन एक पारंपरिक योगासन है।
  • इसमें शरीर एक खुले हुए दरवाजे की आकृति जैसा दिखाई देता है।
  • आसान शब्दों में, परिघासन एक योगासन है जिसमें शरीर को एक ओर झुकाकर साइड बॉडी की गहरी स्ट्रेचिंग की जाती है।
  • यह रीढ़, कमर और पसलियों के आसपास की मांसपेशियों को स्ट्रेच करता है।
  • शुरुआती और अनुभवी दोनों लोग इसका अभ्यास कर सकते हैं।
  • इसे आमतौर पर वार्म-अप या स्ट्रेचिंग योगासन के रूप में भी किया जाता है।
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परिघासन - फोटो : AI

परिघासन कैसे करें? 


स्टेप 1- योगा मैट पर घुटनों के बल बैठकर रीढ़ सीधी रखें। दोनों घुटनों के बीच हल्की दूरी रखें।

स्टेप 2- दाएं पैर को साइड में पूरी तरह सीधा करें। पैर का तलवा जमीन पर टिकाएं और पंजे सामने की ओर रखें।

स्टेप 3- दोनों हाथों को कंधे की सीध में फैलाएं। गहरी सांस लें।

स्टेप 4- बायां हाथ ऊपर उठाएं। सांस छोड़ते हुए दाईं ओर झुकें। दायां हाथ पैर या टखने पर रखें।

स्टेप 5- 20–30 सेकंड तक इसी स्थिति में रहें। धीरे-धीरे वापस आएं। दूसरी तरफ भी यही प्रक्रिया दोहराएं।

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परिघासन कैसे करें - फोटो : AI

परिघासन करने के फायदे
 

  • यह रीढ़ की लचक बढ़ाता है। स्पाइन को स्ट्रेच करता है, जिससे शरीर की गतिशीलता बेहतर होती है।
  • कमर के तनाव को कम करने में मदद करता है। अभ्यास से साइड मसल्स खुलती हैं। लंबे समय तक बैठने से होने वाली जकड़न कम हो सकती है।
  • आसन कंधों को मजबूत बनाता है। शोल्डर मोबिलिटी बेहतर होती है। गर्दन और कंधों का तनाव कम हो सकता है।
  • परिघासन पाचन में सहायता देता है। पेट के आसपास हल्का दबाव बनता है। पाचन तंत्र सक्रिय होने में मदद मिल सकती है।
  • यह आसन फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने में सहायक है। इससे छाती खुलती है और गहरी सांस लेने में आसानी हो सकती है।
  • शरीर का संतुलन बेहतर करता है। कोर मसल्स सक्रिय होती हैं। बैलेंस में सुधार हो सकता है।
  • शरीर को लचीला बनाता है। इसमें हैमस्ट्रिंग, कमर, कूल्हे, पसलियां और कंधे, सभी हिस्सों की स्ट्रेचिंग होती है।
  • मानसिक तनाव कम करने में मदद करता है। अभ्यास से नियंत्रित श्वास मन को शांत करने में सहायक हो सकती है। रिलैक्सेशन महसूस होता है।
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परिघासन कैसे करें - फोटो : AI

किन लोगों को परिघासन नहीं करना चाहिए?
 

  • घुटनों में गंभीर दर्द हो।
  • हाल ही में कमर की सर्जरी हुई हो।
  • स्लिप डिस्क की समस्या हो।
  • गंभीर स्पाइनल इंजरी हो।
  • कंधे की चोट हो।
  • चक्कर आने की समस्या हो।
  • डॉक्टर द्वारा योग से मना किया गया हो।


अभ्यास के दौरान सावधानियां
 

  • झटके से शरीर न मोड़ें।
  • सांस न रोकें।
  • क्षमता से ज्यादा स्ट्रेच न करें।
  • खाली पेट अभ्यास करें।
  • योगा मैट का उपयोग करें।
  • दर्द महसूस होने पर तुरंत रुक जाएं।
  • शुरुआत में प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख में अभ्यास करें।


सामान्य गलतियां
 

  • पीठ को गोल कर लेना।
  • घुटने को गलत दिशा में मोड़ना।
  • बहुत ज्यादा झुक जाना।
  • सांस रोक लेना।
  • जल्दी-जल्दी आसन करना।
  • गर्दन पर अतिरिक्त दबाव डालना।
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गेट पोज - फोटो : AI

परिघासन कब करें?

  • सुबह खाली पेट इस आसन को करना बेहतर समय होता है।
  • योग सेशन के बीच स्ट्रेचिंग के रूप में किया जा सकता है।
  • शाम को भोजन के 3-4 घंटे बाद भी परिघासन का अभ्यास कर सकते हैं।


कितनी देर करें?

  • शुरुआत कर रहे हैं तो परिघासन का अभ्यास 15–20 सेकंड करें।

  • धीरे-धीरे समय बढ़ाते हुए 30-45 सेकंड आसन करें।

  • फिर दोनों तरफ 2-3 बार दोहराएं।



क्या परिघासन वजन घटाने में मदद करता है?

  • सीधे तौर पर वजन कम करने वाला आसन नहीं माना जाता।

  • यह शरीर को सक्रिय रखने, लचीलापन बढ़ाने और नियमित योग अभ्यास का हिस्सा बनने में मदद कर सकता है।

  • संतुलित आहार और अन्य व्यायाम के साथ इसे शामिल करना अधिक लाभकारी हो सकता है।

 

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