महिलाओं के लिए खबर, बच्चे को स्तनपान कराते समय एक गलती भूलकर भी न करें। अगर आपने लापरवाही बरती तो अंजाम बेहद खतरनाक हो सकता है, जानिए कैसे।
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breast feeding
पीजीआईएमएस में कम्यूनिटी मेडिसन विभाग की यूनिट दो की प्रोफेसर डॉ. मीनाक्षी कलहन के अनुसार, देश में 58.4 फीसदी बच्चों को जन्म लेते ही मां का दूध नहीं पिलाया जाता। इस कारण नवजात की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। समय के साथ इनका वजन कम होना, उम्र के हिसाब से वृद्धि न होना, नजरें कमजोर होना, सुस्त रहना और मोटापा जैसी कई समस्याएं उनको घेर लेती हैं।
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breast feeding
नवजात को फीडिंग कराने में आपकी थोड़ी सी लापरवाही उसके वजन बढ़ाने में बाधक बन सकती है। अंडर वेट बच्चों की समस्या आजकल आम हो गई और इसकी मुख्य वजह है सही तरीके से ब्रेस्ट फीडिंग नहीं कराना। डाक्टरों के अनुसार, नवजात को मां का दूध पिलाना जरूरी है, क्योंकि मां के दूध में ही बीमारी से लड़ने के सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। मां को एक ब्रेस्ट से कम से कम 10-15 मिनट फीडिंग करानी चाहिए, तभी उसे सभी पोषक तत्व मिल सकेंगे।
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baby
पांच से सात मिनट तक एक ब्रेस्ट से फीडिंग के दौरान बच्चे को दूध में सिर्फ प्रोटीन मिलता है। इसके बाद ही फैटरिच मिल्क मिलना शुरू होता है। बच्चों को यह फैटरिच मिल्क मिलना जरूरी है। मां का दूध नहीं मिलने पर बच्चे को फार्मूला मिल्क पिलाएं। दूध के पैकेट के रैपर पर दिए गए निर्देशों के अनुसार ही पानी मिलाएं। यदि दूध और पानी की मात्रा में गड़बड़ी आई तो बच्चे का वेट नहीं बढ़ेगा। इसके अलावा बच्चे को गाय-भैंस का दूध भी पिला सकते हैं, लेकिन इस दूध में पानी बिल्कुल न मिलाएं।
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baby hold mother hand
समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों का वेट लॉस 5-10 प्रतिशत होता है। यह वेट लॉस एक समान्य प्रक्रिया है। वहीं, जो बच्चे समय पर पैदा होते हैं, उनका वजन सात से दसवें दिन में बर्थ वेट के बराबर रीगेन हो जाता है। उसके बाद बच्चों का वजन बढ़ना शुरू होता है और लगभग 30-40 ग्राम वजन डेली बढ़ता है। जो बच्चे समय से पहले पैदा होते हैं, वह अपना वेट 14 दिनों तक रिगेन करते हैं और उसके बाद उनका वजन बढ़ना शुरू होता है।
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baby with mother
इन गलत धारणाओं से बचें
अक्सर देखा जाता हैं कि डिलीवरी के बाद महिलाएं मछली और दूध से परहेज करती हैं। उनके मन में भ्रम होता है कि इससे टांके पक सकते हैं और पस आ सकता है, लेकिन मछली व दूध के सेवन से मां को प्रोटीन और रीच डाइट मिलती है। एक धारणा यह भी है कि डिलीवरी के बाद लिक्विड (दूध, जूस) देने से महिला के पेट में तकलीफ होती है, लेकिन यह गलत है। हेल्दी लिक्विड डाइट लेने से मां का दूध ज्यादा बनता है। बच्चे को जन्म के बाद से पहले छह माह तक मां का दूध पिलाना चाहिए। ऐसा नहीं करने पर मां को दूध बनना भी बंद हो जाता है।
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baby 3
बच्चे के प्रति ये सावधानियां बरतें
बच्चे के जन्म पर उसे जन्म घुट्टी नहीं देनी चाहिए। अमलाइकस स्टैंप, कोई भी एंटीसेप्टिक क्रीम, पाउडर नहीं लगाना चाहिए। इससे इनफेक्शन की संभावना बढ़ जाती है। जन्म के दो दिनों के बाद ही बच्चे को नहलाना चाहिए। नाखून से काजल और सुरमा नहीं लगना चाहिए, क्योंकि नाखून में लेड होता है। यह हानिकारक होता है। अक्सर देखा जाता है कि प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं के खानपान का विशेष ध्यान रखा जाता है और जैसे ही डिलीवरी हो जाती है, उनकी डाइट नार्मल कर दी जाती है। इससे मां का दूध बनना भी बंद हो सकता है।
जन्म के बाद से ही बच्चे को मां का दूध पिलाना चाहिए, वरना दूध बनना ही कम हो जाएगा और बच्चे को प्रापर डाइट नहीं मिल पाएगी। - डॉ. रानी सिंह, गायनाकॉलोजिस्ट, जनरल हॉस्पिटल