डेंगू खतरनाक बीमारी है, लेकिन इस बीमारी से डरने की नहीं, बल्कि बचने की जरूरत है। देखिए, कैसे फैलती है ये बीमारी, क्या कारण हैं और कैसे होगा बचाव?
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fever
बहुत से लोगों को नहीं पता कि डेंगू का मच्छर गंदी नालियों में नहीं बल्कि साफ सुथरे पानी में पनपते हैं। साफ सुथरे शहरी इलाकों में रहने वाले लोगों को इसका ज्यादा खतरा रहता है। अगर आप को डेंगू हो जाए तो घबराएं नहीं, भरपूर मात्रा में तरल आहार लें, क्योंकि डिहाइड्रेशन से ही बीमारी खतरनाक होती है और अगर डेंगू के मरीज का प्लेटलेट्स काउंट 10,000 से ज्यादा हो तो प्लेटलेट्स ट्रांसफ्यूजन की जरूरत नहीं होती।
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बुखार के मरीज
- फोटो : amar ujala
डेंगू में तेज बुखार के साथ नाक बहना, खांसी, आखों के पीछे दर्द, जोड़ों के दर्द और त्वचा पर हल्के रैश होते हैं। हालांकि कुछ लोगों में लाल और सफेद निशानों के साथ पेट खराब, जी मिचलाना, उल्टी आदि हो सकता है। चूंकि यह एक वायरस से होता है इसलिए इसकी कोई दवा या एंटीबायटिक नहीं है, इसका इलाज इसके लक्ष्णों का इलाज करके ही किया जाता है। तेज बुखार बीमारी के पहले से दूसरे हफ्ते तक रहता है।
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बुखार के मरीज
- फोटो : ब्यूरो
डेंगू के ज्वर के लक्षण प्रथम चरण में सामान्य ज्वर के तरह ही लगते हैं। प्रथम चरण में डेंगू के लक्षण इस प्रकार के होते हैं- बुखार का टेम्परेचर चढ़ जाता है। बुखार आने के वक्त ठंड लगने लगता है। सर में बहुत दर्द होना। मांसपेशियों या जोड़ों में बहुत दर्द होना। ग्लैंड में दर्द या सूजन होना। उल्टी होना। भूख न लगना। ब्लडप्रेशर कम हो जाना। चक्कर आना। शरीर में रैशज का होना। खुजली होना। कमजोरी होना।
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dengue, malaria, chikungunya
यह तो डेंगू के प्रथम अवस्था के लक्षण हैं जो साधारणतः रोगी के शरीर के मुताबिक होता है। लेकिन जब डेंगू के रोग की स्थिति बहुत गंभीर हो जाती है तब शरीर में कुछ और समस्याएं नजर आने लगती है, जैसे- पेट में तेज दर्द होना। पेशीशूल। लीवर में फ्लूइड का जमा होना। सीने में फ्लूइड का जमा होना। खून में प्लेटलेट्स का कम होना। रक्तस्रावआदि।
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DENGUE
डेंगू से बचने के उपाय
बारिश का पानी निकालने वाली नालियों, पुराने टायरों, बाल्टियों, प्लास्टिक कवर, खिलौनों और अन्य जगह पर पानी रुकने न दें। फव्वारों, पक्षियों के बर्तनों, गमलों इत्यादि से हफ्ते में एक बार पानी बदल दें। अस्थायी पूल्ज को खाली कर दें या उनमें मिट्टी भर दें। स्विमिंग पूल का पानी बदलते रहें और उसे चलता रखें। दीवारों, दरवाजों और खिड़कियों की दरारों को भर दें। दरवाजों और खिड़कियों की अच्छे से जांच कर लें। बच्चे को सुलाने वाले कैरियर और अन्य बिस्तर को मच्छरदानी से ढक दें। लंबी बाजू की शर्ट, पैंट और जुराबें पहनकर मच्छरों के कटने से बचें। टीशर्ट को अपनी पैंट और पैंट को जुराबों में डाल कर रखें, ताकि खाली जगह से मच्छर काट न सकें। सूर्य उदय और अस्त के समय व शाम को घर के अंदर रहें, क्योंकि मच्छर इस वक्त ज्यादा सक्रिय होते हैं।
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डेमो पिक
सस्ता, पर घरेलू इलाज
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (नाइपर) के वैज्ञानिक ने डेंगू की बीमारी का सस्ता इलाज ढूंढ निकालने का दावा किया है। डॉ हरबंस सिंह का दावा है कि आंवले का एक ऐसा काढ़ा तैयार किया गया है, जिसे पीने से डेंगू का मरीज ठीक हो सकता है। काढ़े में आंवला के अलावा नीम, पपीते के पत्ते और गिलोय का भी उपयोग किया गया है। उनका दावा है कि नाइपर की ओपीडी में यह काढ़ा मरीजों को मुफ्त दिया जा रहा है। पंजाब के कई जिलों में इस काढ़े को मुफ्त में बांटा गया।
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Dengue
- फोटो : Demo Pic
डॉ. हरबंस का दावा है कि कई मरीज यह काढ़ा पीने से ठीक हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि जड़ी-बूटियां दूसरी उपचार पद्धतियों से ज्यादा कारगर हैं। फेज-8 में स्वदेशी जागरण मंच द्वारा आयोजित पांच दिवसीय स्वेदेशी मेले में नाइपर का भी स्टॉल लगा है। यहां लोगों को गंभीर बीमारियों की जानकारी के साथ घरेलू नुस्खों से उनका उपचार भी बताया जा रहा है। डॉ. हरबंस ने बताया कि काढ़ा घर पर भी आसानी से तैयार किया जा सकता है। काढ़ा बनाने के लिए आंवला, गिलोय, नीम और पपीते के पत्ते को पानी में डालकर देर तक उबालना चाहिए। इसके बाद छानकर इसका प्रयोग किया जा सकता है। काढ़े को 15 दिन तक दिन में तीन बार पीना होगा।
डेंगू से बचाव के लिए प्रचुर मात्रा में तरल पदार्थों, विटामिन सी से परिपूर्ण फल मसलन आंवला, कीवी का प्रयोग करना चाहिए। डेंगू के संक्रमण से निवारण के लिये पपीते के पत्तों का रस, गिलोय के रस या काढ़ा, घृत कुमारी, सवमअमतंद्ध, हर सिंगार के पत्तों का रस लेना फायदेमंद होगा। उन्होंने कहा कि प्लेटलेट्स की गिनती कम होने के कारण आंतरिक रक्तस्त्राव होता है। इससे बचने के लिए गोखरू का चूर्ण या कषाय का सेवन करना चाहिए।