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Yoga Tips: स्तर कैंसर में इन योगासनों से मिल सकता है विशेष लाभ, आप भी कीजिए रोजाना अभ्यास

Sat, 07 Oct 2023 11:36 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

इस लेख में योग के कुछ विशेष आसन और प्राणायाम बताएं जा रहे हैं, जो स्तर कैंसर के खतरे को कम करने में मददगार हो सकते हैं।
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स्तन कैंसर के जोखिम को कैसे कम करें? - फोटो : istock
Breast Cancer Awareness Month 2023 Yoga Asanas: स्तन कैंसर जागरूकता माह अक्तूबर महीने में मनाया जाता है। स्तन कैंसर से संबंधित जागरूकता बढ़ाने और स्तन कैंसर की प्रतिरोधकता बढ़ाने के उद्देश्य से इस जागरूकता माह को मनाते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य स्तन कैंसर की पहचान, जागरूकता, जांच, और उपचार के माध्यम से महिलाओं की स्वास्थ्य की देखभाल को प्रोत्साहित करना है।

पहली बार 1985 में स्तन कैंसर जागरूकता माह मनाने की शुरुआत हुई। 2009 में स्तन कैंसर जागरूकता माह के तहत Global Pink Hijab Day की शुरुआत हुई, जिसमें मुस्लिम महिलाएं गुलाबी हिजाब पहनकर स्तन कैंसर जागरूकता को समर्थन देते दिखीं।

आंकड़ों से पता चलता है कि हर 8 में से एक महिला इस कैंसर का शिकार हो जाती हैं। अन्य प्रकार के ही कैंसर की तरह स्तन कैंसर भी जानलेवा है। राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के अनुसार, योग के माध्यम से कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। योगाभ्यास उन हार्मोन के स्तर को कम करने में सहायक होते हैं, जो स्तर कैंसर का जोखिम बढ़ाते हैं। इस लेख में योग के कुछ विशेष आसन और प्राणायाम बताएं जा रहे हैं, जो स्तर कैंसर के खतरे को कम करने में मददगार हो सकते हैं।
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Balasana - फोटो : istock
बालासन

बालासन को चाइल्ड पोज के रूप में भी जाना जाता है। यह मुद्रा छाती की मांसपेशियों, कूल्हों, जांघों और पीठ को आराम देती है। स्तन कैंसर के रोगियों के लिए बालासन का अभ्यास लाभदायक हो सकता है। मस्तिष्क को शांत रखने के साथ ही थकान-तनाव से राहत दिलाने में बालासन का अभ्यास कर सकते हैं। 
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bhramari pranayama - फोटो : istock
प्राणायाम

शोधकर्ताओं के मुताबिक, ब्रेस्ट कैंसर की समस्या में प्राणायाम के अभ्यास की आदत से लाभ मिल सकता है। रेडिएशन थेरेपी ले रहे स्तन कैंसर रोगियों के लिए प्राणायाम एक सहायक चिकित्सा के तौर पर उपयोगी है। कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने के अलावा मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए प्राणायाम के अभ्यास किया जा सकता है।

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matsyasana - फोटो : istock
मत्स्यासन योग

मत्स्यासन योग को हार्ट ओपनर योग कहते हैं, इसका अर्थ है छाती, पसलियों, फेफड़े और पीठ के ऊपरी हिस्से को खोलना। यह स्तनों और पेक्स में लिंफेटिक ड्रेनेज को उत्तेजित करके ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम करता है। योग विशेषज्ञों के मुताबिक इस योग के नियमित अभ्यास से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ सकती है, जो कैंसर को जोखिम को कम करने में सहायक है। 
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breast - फोटो : breast
नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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