योग केवल एक शारीरिक व्यायाम ही नहीं है बल्कि यह व्यक्ति अथवा योग करने वाले की मानसिक अवस्था को भी नियंत्रित करता है। यही वजह है कि महर्षि पतंजलि ने योग को मनुष्य के अंतःकरण में चित्त में उठने वाली वृत्त्तियों और प्रवृत्तियों के निषेध के रूप में भी व्याख्यायित किया है। जानकर मानते हैं की योग और योगासनों को केवल कुछ शारीरिक अवस्थाओं तक ही सीमित नहीं माना जा सकता। कहा जाता है योग के आसनों कि संख्या असंख्य है और इस पृथ्वी पर जलचर, थलचर और उभयचर जितने भी प्राणी या जीवजंतु हैं और जैसी उनकी आकृति है उतने तरह के योगासन माने गए हैं। अगर आपने अभी तक स्वस्थ जीवन के लिए योग नहीं अपनाया है तो इसके फायदे जान लें।