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Year Ender 2020: जब कोरोना वायरस को चुनौती देने लाखों मजदूर दिल्ली के बस अड्डे पर हो गए थे इकट्ठा

Thu, 10 Dec 2020 06:30 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मजदूर, रोज कमाने-खाने वाले लोग हैं, उनके पास बचत का विकल्प नहीं है - फोटो : PTI

कोरोनाकाल में जैसे ही घोषणा हुई कि इस खतरनाक वायरस से लोगों को बचाने के लिए देश के हित में लॉकडाउन का फैसला लिया जा रहा है, लोगों का जनजीवन अलग-अलग तरह से प्रभावित हुआ। लेकिन बहुत ही जल्दी यह स्पष्ट हो गया कि जिस तरह से इस निर्णय ने देश के मजदूर वर्ग को प्रभावित किया है, समाज का कोई भी अन्य वर्ग इतना संकट में नहीं था। मजदूर, रोज कमाने और खाने वाले लोग होते हैं उनके पास बचत का कोई विकल्प नहीं होता है, ऐसे में उनके लिए जीवनयापन करना आए दिन दुर्भर होता जा रहा था। अगली स्लाइड्स में जानिए कोरोनाकाल में लगे देशव्यापी लॉकडाउन ने किस तरह कर दिया था मजदूरों का जीवन तहस-नहस।

 

 

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थोड़े ही दिनों में मजदूरों के घर राशन के लाले पड़ने लगे - फोटो : अमर उजाला।

मजदूर हुए बेरोजगार
जैसे ही देश में लॉकडाउन की घोषणा हुई। सब जगह काम होना बंद गया। इमारतें अधबीच में रह गई, सरकारी कामों में ठहराव आ गया, वायरस के खौफ से मालिकों ने ड्राइवर, बावर्ची, माली आदि सभी को निकाल दिया। ऐसे में ये सभी लोग बेरोजगार हो गए। किसी मजदूर को कोई काम नहीं मिला। थोड़े ही दिनों में मजदूरों के घर राशन के लाले पड़ने लगे। छोटे-छोटे बच्चे भूख से तड़पने लगे।

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लोगों ने इन परिश्रम करने वाले साथियों की मदद करने का प्रयास किया - फोटो : amar ujala

लोगों की सहायता पर गुजारा जीवन
थोड़े दिन तो लोगों ने भी इन परिश्रम करने वाले साथियों की मदद करने का प्रयास किया। सरकार और संगठनों ने लॉकडाउन के बीच ही इन्हें राशन एवं भोजन पैकेट पहुंचाए लेकिन इस तरह से जीवन कब तक चलता। जिन मकान मालिकों के घर ये लोग किराये से रह रहे ते अब तो उनका भी जीवन मुश्किल हो रहा था। ऐसे में बिना किराया लिए इन्हें कैसे रहने दिया जा सकता था। 

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लाखों मजदूर दिल्ली के बस अड्डे पर जमा हो गए - फोटो : अमर उजाला।

सामूहिक पलायन
फिर देश ने एक ऐसा दृश्य भी देखा जब लोगों के घरों से निकलने पर कड़ी सख्ती होने के बावजूद लाखों मजदूर दिल्ली के बस अड्डे पर जमा हो गए। बहुत सारे मजदूर साईकिल से, पैदल अपने घरों को गांव की ओर चल दिए। राजस्थान से महाराष्ट्र, दिल्ली से उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश से पंजाब देश के हर कोने से मजदूर अपने घर को निकले और गांव जाकर ही उन्होंने चैन की सांस ली।

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समाज ने ये जाना कि कोई इंसान छोटा- बड़ा नहीं होता है - फोटो : अमर उजाला।

शहरी लोग हुए परेशान
जब सारे मजदूर अपने घरों को चले गए तो शहरी लोगों पर विपत्ति छा गई। इसके पीछे वजह यह थी कि हम अपने छोटे- बड़े कामों के लिए अन्य लोगों पर इतने निर्भर हो गए हैं कि यदि कुछ भी बिगड़ जाता है तो हम फौरन परेशान हो जाते हैं। ऐसे में लोगों ने टूटे गेट को खुद से ठीक करने के प्रयास किए तो अधूरे काम को पूरा करने के लिए धीरज का भी सहारा लिया। इसी बहाने समाज ने ये जाना कि कोई इंसान छोटा- बड़ा नहीं होता है, जीवन में सबका अपना महत्व होता है।

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