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मेंटल हेल्थ से भारत में जूझ रहे करोड़ो लोग, लेकिन नहीं हैं अस्पताल

Sat, 12 Oct 2019 01:08 PM IST
ललित फुलारा लाइफस्टाइल डेस्क,अमर उजाला
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- फोटो : Pixabay
भारत में मेंटल हेल्थ एक बड़ा मुद्दा है और इससे निपटने के लिए साइकेट्रिस्ट (मनोचिकित्सक) की संख्या बढ़ाई जाएगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक़ फ़िलहाल 18 फ़ीसदी भारतीय डिप्रेशन यानी अवसाद के शिकार हैं। डॉक्टर हर्षवर्धन का कहना है भारत में मेंटल हेल्थ एक चिंता का विषय है और बड़ी तादाद में मौजूद हैं लेकिन इस मुद्दे पर मौजूद आंकड़ो से वो सहमत नहीं दिखते। 
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उनका कहना है, "कई आंकड़े हैं। कुछ आंकड़े कहते हैं 40 में से एक व्यक्ति या 20 में से एक व्यक्ति कभी न कभी डिप्रेशन का शिकार रहा है या अभी डिप्रेशन में है। लेकिन सरकार इसके प्रति गंभीर है और मेंटल हेल्थकेयर एक्ट 2017 में दिए गए प्रावधानों के तहत क़दम भी उठा रही है।''

वे बताते हैं कि इससे पहले 1987 में क़ानून लाया गया था लेकिन बाद में देखा गया कि उसकी प्रासंगिकता ख़त्म हो गई और वो अमानवीय था। इसमें बदलाव कर साल 2014 में मेंटल हेल्थ नीति बनाई गई थी और इसे एक मानवीय चेहरा देने की कोशिश की गई है। 
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sad - फोटो : social media
डॉक्टर हर्षवर्धन ने बताया कि सरकार मेंटल हेल्थकेयर एक्ट 2017 लाया, जिसमें कई प्रावधान किए गए. इनमें से एक आत्महत्या को अपराध की श्रेणी से बाहर निकालना भी है। उनका कहना था "मेंटल हेल्थ सेवाओं को ज़मीनी स्तर पर ले जाया गया है।

पूरे भारत में 650 ज़िलों में स्थित प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों में सपोर्ट सिस्टम बनाए गए हैं जिसके तहत सभी प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों में एक मनोचिकित्सक विशेषज्ञ के साथ एक सोशल वर्कर, मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञ और आयुष्मान भारत के तहत आने वाले डेढ़ लाख हेल्थ और वेलनेस सेंटर में भी मेंटल हेल्थ पर फोकस किया गया।''

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उदासी
हालांकि उन्होंने इस बात को माना कि जितनी गंभीर ये समस्या है उसके मुताबिक भारत में मनोचिकित्सकों का संख्या कम है और इस दिशा में काम हो रहा है।

दिल्ली स्थित इंस्टिट्यूट ऑफ़ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज़ (इब्हास) के निदेशक डॉक्टर निमीश देसाई के अनुसार अमेरिका में जहां 60-70 हज़ार मनोचिकित्सक हैं वहीं भारत में ये संख्या चार हज़ार से भी कम है। यहां इस वक़्त 15 से 20 हज़ार मनोचिकित्सकों की ज़रूरत है। 
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- फोटो : pexels.com
देश में फ़िलहाल 43 मेंटल अस्पताल हैं। डॉक्टर निमीश देसाई के अनुसार इन मेंटल अस्पतालों में से दो या तीन सुविधाओं के स्तर पर बेहतर माने जाते हैं, 10-12 में सुधार हो रहा है जबकि 10-15 अभी भी कस्टोडियल मेंटल हॉस्पिटल बने हुए हैं।

हालांकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कुछ मेंटल संस्थानों में कस्टोडियल कमरों की बात से इनकार करते हुए कहते हैं- ''मेंटल हेल्थ संस्थानों, मेडिकल कॉलेज, साइक्रेटिक विभागों की बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने और उन्हें विकसित करने के लिए पूरा सपोर्ट किया जा रहा है और मनोचिकित्सों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी।''
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sad teacher
भारत में मानसिक सेहत एक ऐसा विषय है जिस पर खुलकर बात नहीं होती। बीबीसी की कोशिश लोगों को मेंटल हेल्थ के बारे में जागरूक करने की है। इस विशेष श्रृंखला में हम आपको सिलसिलेवार तरीके से बताएंगें कि आपको कब मेंटल हेल्थ के बारे में सोचने की ज़रूरत है।

कुछ ऐसे लोगों से मिलवाएंगे जो अकेलेपन और डिप्रेशन या फिर अन्य किसी मानसिक बीमारी का शिकार रहे हैं या जिन्होंने अपने घर में मौजूद मानसिक रोगियों की देखभाल करते हुए डिप्रेशन आदि का सामना किया है।और ये लोग कैसे इससे बाहर निकलकर दूसरों को मानसिक रोग से बाहर आने में मदद कर रहे हैं।
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