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Year Ender 2022: कोविड काल के बाद इस साल बढ़ा सोलो ट्रैवलिंग का ट्रेंड, जानें इसकी वजह और असर

Sun, 18 Dec 2022 05:20 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

लोगों को कोविड काल के बाद संक्रमण के डर और तनाव से मानसिक शांति के लिए घूमना सबसे बेहतर विकल्प लगा। ट्रैवलिंग के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव नजर आया। सोलो ट्रैवलिंग का ट्रेंड बढ़ गया।
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सोलो ट्रैवलिंग का ट्रेंड - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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Year Ender 2022 Solo Travel Trend: कोरोना संक्रमण का असर पहले की तुलना में कम हुआ है। दो साल कोविड के प्रकोप से लोग परेशान रहे। कोरोना से बचाव के लिए दुनियाभर के तमाम देशों ने कई पाबंदियां लगा दीं। कई देशों में लाॅकडाउन लगा। वर्क फ्रॉम होम कल्चर बढ़ा। लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो गए। वर्ष 2022 की शुरुआत में भी भारत में एक बार फिर लॉकडाउन वाली स्थिति आ गई। जनवरी में अचानक से संक्रमण के मामले बढ़े तो लोग फिर से घर में रहने को मजबूर हो गए। लेकिन जब लॉकडाउन खुला तो लोग दोबारा अपने पुराने जीवन में लौटे।

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घर में कैद लोग तनावग्रस्त होने लगे। उन्हें संक्रमण के डर और तनाव से मानसिक शांति के लिए घूमना सबसे बेहतर विकल्प लगा। लोग बड़ी संख्या में यात्रा में निकलें। एक बार फिर पर्यटन स्थल सैलानियों से गुलजार हो गए। हालांकि ट्रैवलिंग के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव नजर आया। सोलो ट्रैवलिंग का ट्रेंड बढ़ गया। दरअसल, लोग बाहर घूमने जाना चाहते थे, लेकिन आर्थिक और सामाजिक कारणों से उनके साथ सफर करने वाले नहीं थे। ऐसे में लोग अकेले ही सफर पर निकल पड़े। आइए जानते हैं क्या होती है सोलो ट्रैवलिंग, क्यों और कैसे बढ़ा वर्ष 2022 में सोलो ट्रैवलिंग का ट्रेंड और इसका असर।

क्या है सोलो ट्रैवलिंग?

सोलो ट्रैवलिंग का अर्थ है अकेले सफर पर निकलना। सामान्य यात्रा में लोगों के साथ उनके दोस्त, परिवार के लोग या पार्टनर होता है। लेकिन सोलो ट्रैवलिंग में लोग अकेले ही किसी जगह की सैर पर निकल पड़ते हैं।
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कोविड काल के बाद क्यों बढ़ा सोलो ट्रैवल का ट्रेंड

कोरोना काल के बाद सोलो ट्रैवलिंग का ट्रेंड बढ़ने के सामाजिक, आर्थिक और अन्य कई कारण हैं।
 

  • कोरोना काल में लोग पूरा दिन परिवार के साथ रहते थे। वह कुछ वक्त खुद के साथ अकेले में बिताना चाहते थे। मन की शांति के लिए परिवार के बिना लोग सफर पर निकले। वहीं जो लोग दोस्तों के साथ घूमना पसंद करते थे, वह भी सोलो ट्रैवलिंग की ओर बढ़े।
  • दरअसल, कोविड के दौर में लोगों में सामाजिक दूरी आई। घर में कैद लोग अपने दोस्तों से मिल नहीं सकते थे। अधिक वक्त नहीं बिता सकते थे। ऐसे में या तो वह अक्सर जिन दोस्तों के साथ हैंगआउट करते थे, उनसे दूर हो गए, या वह उनके साथ ऑनलाइन माध्यम से इतना ज्यादा कनेक्ट रहे कि उनसे भी ब्रेक लेना चाहते थे।
  • एक कारण यह भी रहा कि कोरोना के बाद कई लोग वापस दफ्तर पहुंचे। कई दोस्तों या रिश्तेदारों को बाहर घूमने जाने की छुट्टी नहीं मिल सकती थी। संक्रमण के भय के कारण भी कुछ लोग शहर से बाहर नहीं जाना चाहते थे। इसीलिए लोगों से उनके ट्रैवल पार्टनर छूट गए और मजबूरन उन्हें अकेले ही सफर पर निकलना पड़ा।
  • सोलो ट्रैवलिंग का ट्रेंड बढ़ने का एक आर्थिक कारण भी है। सोलो ट्रैवलिंग तुलना में ग्रुप ट्रैवलिंग से सस्ता है। जब कोरोना के बाद लोगों पुराने ढर्रे पर आए तो कई लोग आर्थिक तौर पर कमजोर हो गए थे। उन्हें अपनी आर्थिक स्थिति को दोबारा पटरी पर लाना था। ऐसे में वह परिवार या दोस्तों के साथ सफर करने के लिए तैयार नहीं थे।

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सोलो ट्रैवलिंग का असर
 

  • सोलो ट्रैवलिंग का काफी असर भी देखने को मिला। पर्यटन क्षेत्रों में जहां भीड़ देखने को मिलती थी, वहां पहले से कम भीड़ पहुंची।
  • लोगों ने सोलो ट्रैवलिंग के लिए ऐसे माध्यमों का चयन किया जो अकेले इंसान के लिए उपयुक्त है। जैसे पर्यटन स्थलों पर बाइक या स्कूटर किराए पर अधिक मिलना शुरू हुई। परिवार के साथ जाने वाले टैक्सी बुक करते हैं लेकिन सोलो ट्रैवलर्स बाइक या स्कूटी से यात्रा कर लेते हैं।
  • सोलो ट्रैवलिंग में कम पैसा लगता है। उन्हें सफर करने या ठहरने के लिए किसी ऐसी जगह या चीजों की जरूरत नहीं होती, तो परिवार या ग्रुप ट्रैवलिंग में होती है।
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