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यदाद्री मंदिर का इतिहास और मान्यता
स्कंद पुराण में यदाद्री मंदिर का वर्णन मिलता है। मान्यताओं के मुताबिक, महर्षि ऋष्यश्रृंग के बेटे यद ऋषि ने भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की थी। भगवान विष्णु ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर नृसिंह रूप में उन्हें दर्शन दिए। उसके बाद भगवान नृसिंह इस स्थान पर तीन रूपों में विराजमान हैं। मान्यताओं के मुताबिक, भगवान विष्णु की नृसिंह प्रतिमा दुनियाभर में मात्र इसी मंदिर में है। मंदिर के अंदर 30 करीब 12 फीट ऊंची और 30 फीट लंबी गुफा है, जहां नृसिंह भगवान के तीन मूर्तियां, जिसमें ज्वाला नृसिंह, गंधभिरंदा नृसिंह और योगानंद नृसिंह की प्रतिमा है। साथ ही माता लक्ष्मी जी की प्रतिमा भी है।