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Tungnath Temple: दुनिया में सबसे अधिक ऊंचाई पर है भगवान शिव का तुंगनाथ मंदिर, जानें कैसे पहुंचेंगे आप

Thu, 22 Jun 2023 07:05 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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Tunganath mahadev mandir - फोटो : facebook

Tungnath Temple : सावन का पावन महीना शुरू हो रहा है। 4 जुलाई से सावन है जो कि रक्षाबंधन तक जारी रहेगा। सावन को भगवान भोलेनाथ की आराधना का पर्व माना जाता है। सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा होती है। श्रद्धालु शिव मंदिरों में दर्शन के लिए जाते हैं।

भारत में 12 ज्योतिर्लिंग, कई प्राचीन और प्रसिद्ध शिव मंदिर हैं। उत्तर से दक्षिण व पूर्व से पश्चिम तक हर राज्य में भक्तों की आस्था से जुड़े शिव मंदिर हैं। भोलेनाथ के कई मंदिर तो विश्व प्रसिद्ध हैं। सावन के मौके पर केदारनाथ से लेकर बाबा विश्वनाथ और महाकालेश्वर धाम तक में भक्तों की भीड़ उमड़ेगी।

हालांकि अगर इस सावन के मौके पर आप किसी अद्भुत और दिव्य मंदिर के दर्शन करना चाहते हैं तो दुनिया के सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित शिव मंदिर के दर्शन करने जा सकते हैं। इस मंदिर का नाम तुंगनाथ मंदिर है। आइए जानते हैं तुंगनाथ मंदिर का धार्मिक महत्व, दुनिया का सबसे ऊंचाई पर स्थित मंदिर कहां है और कैसे दर्शन के लिए तुंगनाथ मंदिर पहुंचें।
 

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tunganath mahadev mandir - फोटो : facebook
तुंगनाथ मंदिर कहां है?

भगवान शिव का प्राचीन तुंगनाथ मंदिर उत्तराखंड के गढ़वाल के रुद्रप्रयाग जिले में ऊंचे पर्वत पर स्थित है। तुंगनाथ मंदिर महादेव के पंच केदारों में से एक है, जो चारों तरफ से बर्फ से ढका रहता है।
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Tungnath mandir - फोटो : facebook
तुंगनाथ मंदिर का इतिहास

मान्यता है कि तुंगनाथ मंदिर को पांडवों ने भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए बनवाया था। कहा जाता है कि कुरुक्षेत्र में हुए नरसंहार को लेकर शिव जी पांडवों से नाराज थे, इसलिए उन्हें खुश करने के लिए इस सुंदर स्थान पर शिव शंभू का मंदिर बनवाया।

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tunganath mahadev mandir - फोटो : facebook
मां पार्वती ने की तपस्या

स्थानीय लोगों का कहना है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए इसी स्थान पर तपस्या की थी। मंदिर से जुड़ी एक कथा यह भी है कि भगवान राम ने रावण के वध के बाद स्वयं को ब्रह्महत्या के शाप से मुक्त करने के लिए इसी स्थान पर तपस्या की। इस कारण इस जगह को चंद्रशिला भी कहते हैं।
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तुंगनाथ मंदिर का सफर - फोटो : istock
कैसे पहुंचे तुंगनाथ मंदिर

तुंगनाथ मंदिर पहुंचने के लिए यात्री उखीमठ के रास्ते जा सकते हैं, जहां उन्हें सड़क मार्ग के जरिए मंदाकिनी घाटी में प्रवेश करना होता है। आगे बढ़ने पर अगस्त्य मुनि नाम का एक छोटा कस्बा मिलता है, जहां से हिमालय की नंदा खाट चोटी देखने को मिलती है। इसके अलावा चोपता से तुंगनाथ मंदिर की दूरी महज तीन किलोमीटर है। बस से चोपता पहुंचकर मंदिर तक पैदल यात्रा कर सकते हैं।
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तुंगनाथ मंदिर का रूट - फोटो : istock
तुंगनाथ मंदिर कब जाएं

नवंबर के बाद से इस स्थान पर बर्फबारी होने लगती है और मंदिर बर्फ की सफेद चादर से ढक जाता है। तुंगनाथ मंदिर जाने के लिए सबसे उपयुक्त समय जुलाई-अगस्त का होता है। इन महीनों में यहां की खूबसूरती अधिक बढ़ जाती है। आसपास हरियाली और बुरांश के फूल देखने को मिल जाते हैं।
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