चांद की धरती में बनी है मोनेस्ट्री
दरअसल पूर्णिमा की रात को यहां की जमीन चांद की तरह चमकने लगती है इसलिए यह जगह मूनस्केप कही जाती है। यहां पर लामायुरु मोनेस्ट्री है जिसे देखने के लिए दुनिया भर से सैलानी आते हैं। इस मोनेस्ट्री को ग्यारहवीं शताब्दी में महासिद्धाचार्य नारोपा ने खोजा था। ये मोनेस्ट्री पांच इमारतों में पहाड़ों पर बनी है। जिसे देखना अद्भुत अनुभव होता है।